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अपने घर उगा सकते हैं ताजी-लाल गाजर, बस इन बातों का रखें ध्यान

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ABP News
September 14, 20263 min read
अपने घर उगा सकते हैं ताजी-लाल गाजर, बस इन बातों का रखें ध्यान

बाजार से खरीदी गई सब्जियों में केमिकल और पेस्टिसाइड्स के बढ़ते खतरे ने आज हर किसी को अपनी सेहत को लेकर फिक्रमंद कर दिया है. यही वजह है कि शहरों से लेकर कस्बों तक लोग अब अपनी छतों और बालकनी में किचन गार्डनिंग को तेजी से अपना रहे हैं. अगर आप भी घर पर ताजी, मीठी और एकदम लाल गाजर उगाने का मन बना रहे हैं. तो यह सोचना बिल्कुल छोड़ दीजिए कि इसके लिए आपको किसी खेत की जरूरत होगी.

गाजर एक ऐसी रूट वेजिटेबल है जिसे सही प्लानिंग, सही पॉट और भुरभुरी मिट्टी के साथ किसी भी छोटे गमले या ग्रो बैग में बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है. घर की उगी गाजर का स्वाद बाजार वाली कोल्ड स्टोरेज की बेस्वाद गाजरों से कहीं ज्यादा बढ़िया होता है. बस शुरुआत करते समय कुछ बेसिक रूल्स को समझना जरूरी होता है. चलिए जानते हैं कि अपने घर पर गाजर उगाने का आसान तरीका क्या है.

ऐसे तैयार करें गमला

गाजर उगाने आपके गमले की गहराई और मिट्टी की बनावट में कोई नहीं रहनी चाहिए. चूंकि गाजर जमीन के नीचे सीधे बढ़ती है इसलिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा गमला और ड्रेनेज होल वाला चौड़ा ग्रो बैग चुनें. उथले गमले में गाजर की जड़ें नीचे नहीं जा पाएंगी और वे मुड़कर टेढ़ी-मेढ़ी या छोटी रह जाएंगी. इसके बाद बारी आती है मिट्टी तैयार करने की.

गाजर को कभी भी सख्त या चिकनी मिट्टी में न लगाएं वरना कंद का फैलाव रुक जाएगा. एक आइडियल पॉटिंग मिक्स बनाने के लिए 40 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की सड़ी खाद और 30 प्रतिशत छनी हुई बालू रेत मिलाएं. रेत मिलाने से मिट्टी एकदम हल्की और भुरभुरी बनी रहती है. जिससे गाजर बिना किसी रुकावट के गहराई तक लंबी, सीधी और मोटा शेप ले पाती है.


बीज बोने का सही तरीका

पॉटिंग मिक्स तैयार करने के बाद गमले में पानी डालकर मिट्टी को हल्का नम कर लें. अब गाजर के बीजों को मिट्टी के ऊपर आधा इंच की गहराई पर बिखेर दें और ऊपर से हल्की मिट्टी या कोकोपीट की परत से ढक दें. गाजर के बीज बहुत बारीक होते हैं इसलिए पाइप से तेज पानी देने के बजाय हमेशा वाटर स्प्रेयर का इस्तेमाल करें जिसस बीज अपनी जगह से न हिलें. लगभग एक हफ्ते से दस दिनों में छोटे-छोटे अंकुर बाहर निकल आते हैं.

जब पौधे दो से तीन इंच बड़े हो जाएं तो सबसे जरूरी काम होता है थिनिंग करना. यानी पास-पास उगे कमजोर पौधों को उखाड़कर अलग कर दें और हर दो पौधों के बीच कम से कम 2 से 3 इंच का गैप रखें. अगर पौधे बहुत घने रहेंगे, तो गाजरें पतली और कमजोर रह जाएंगी. मिट्टी में हमेशा हल्का मॉइस्चर रखें लेकिन ओवर-वाटरिंग से बचें.


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इतने दिन बाद हार्वेस्टिंग

गाजर को भरपूर मिठास और गहरा लाल रंग देने के लिए रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप बेहद जरूरी है. इसलिए अपने गमलों को छत या फिर घर की बालकनी के उस हिस्से में रखें जहां दिनभर अच्छी धूप आती हो. जब पौधे 25 से 30 दिन के हो जाएं तब जड़ों की अच्छी ग्रोथ के लिए 15 दिन में एक बार लिक्विड सीवीड फर्टिलाइजर गमले में डालें.

ध्यान रहे कि ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद न दें, वरना ऊपर पत्तियां ही पत्तियां घनी होंगी और नीचे गाजर छोटी रह जाएगी. करीब 70 से 85 दिनों में गाजर की ऊपरी लाल सतह मिट्टी के ऊपर हल्की सी दिखने लगती है. तब आप समझ जाएं कि तोड़ने का समय आ गया है. हल्की खुरपी से मिट्टी ढीली करके ताजी और केमिकल-फ्री गाजर बाहर निकाल सकते हैं.

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