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जुगाली करना छोड़ दे गाय या भैंस तो हो जाएं सावधान, भारी पड़ सकती है लापरवाही

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ABP News
October 22, 2026•3 min read
जुगाली करना छोड़ दे गाय या भैंस तो हो जाएं सावधान, भारी पड़ सकती है लापरवाही

Cattle Care Tips: गाय या भैंस चारा खाने के बाद आराम से बैठकर मुंह चलाती रहती है. इसे जुगाली करना कहते हैं. आमतौर पर पशुपालक इसे रोज देखते हैं, इसलिए इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. लेकिन अगर आपका पशु अचानक जुगाली करना बंद कर दे, तो इसे मामूली बात समझकर नजरअंदाज न करें. यह पेट की गड़बड़ी, चारे में बदलाव या किसी दूसरी परेशानी का संकेत हो सकता है.

समय रहते वजह का पता चल जाए, तो पशु की हालत बिगड़ने से बचाई जा सकती है. खासकर दूध देने वाले पशुओं में ऐसी परेशानी होने पर उनके खानपान और दूध उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

जुगाली बंद होना किस परेशानी का संकेत है?

गाय और भैंस जैसे पशुओं का पाचन दूसरे जानवरों से अलग होता है. वे चारा खाने के बाद उसे दोबारा मुंह में लाकर चबाते हैं, जिससे खाना अच्छी तरह पचने में मदद मिलती है. अगर पशु जुगाली करना छोड़ दे, तो इसके पीछे पेट में गैस बनना, अपच, बुखार या किसी दूसरी बीमारी जैसी वजह हो सकती है. कई बार पेट में दर्द होने पर भी पशु चारा खाना कम कर देता है और जुगाली बंद हो जाती है.

चारा-पानी में बदलाव पर दें ध्यान

पशु के खाने में अचानक बदलाव करने से भी परेशानी हो सकती है. अगर हरे चारे के साथ जरूरत से ज्यादा दाना या नया चारा एकदम से देना शुरू कर दिया जाए, तो पाचन बिगड़ सकता है. इसलिए पशु के आहार में बदलाव धीरे-धीरे करें. उसे साफ पानी दें और चारे में फफूंद या सड़न तो नहीं है, यह भी जांच लें. पशु को रोज पर्याप्त और संतुलित आहार देना जरूरी है.

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इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

अगर गाय या भैंस जुगाली नहीं कर रही है और साथ में चारा खाना भी छोड़ दिया है, तो सावधान हो जाएं. पेट का असामान्य रूप से फूलना, बार-बार उठना-बैठना, बेचैनी, सुस्ती या दूध कम देना भी परेशानी के संकेत हो सकते हैं. खासकर पेट तेजी से फूल रहा हो या पशु को सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक की मदद लें. ऐसी स्थिति में देर करना खतरनाक हो सकता है.

पशु की जुगाली बंद हो तो क्या करें?

सबसे पहले देखें कि पशु चारा खा रहा है या नहीं, पानी पी रहा है या नहीं और उसका व्यवहार सामान्य है या नहीं. उसे साफ पानी और आरामदायक जगह दें, लेकिन बिना सलाह के कोई दवा, तेल या घरेलू नुस्खा न आजमाएं. पशु का पेट फूला हुआ हो या वह दर्द में दिखे, तो खुद इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर को बुलाएं.

समय पर इलाज से बच सकता है नुकसान

पशु की जुगाली पर रोज ध्यान देना पशुपालकों की छोटी-सी आदत हो सकती है, लेकिन इससे बीमारी के शुरुआती संकेत पकड़ने में मदद मिलती है. अगर जुगाली लंबे समय तक बंद रहे या दूसरे लक्षण भी दिखाई दें, तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

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