पशुपालन के क्षेत्र में इन दिनों नए तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है जिससे कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाया जा सके. जो किसान बकरी पालन से जुड़े हैं वे अच्छी तरह जानते हैं कि बकरों का वजन और उनका शारीरिक ग्रोथ ही उनकी कमाई का बड़ा जरिया होता है. बाजार में जब बकरे को बेचने की बारी आती है तो ग्राहक और व्यापारी सबसे पहले उसका वजन और उसकी सेहत ही देखते हैं. ऐसे में सिर्फ पारंपरिक चारे के भरोसे रहना अब फायदेमंद नहीं रहा है. क्योंकि एक ही तरह का खाना खाने से पशुओं की ग्रोथ एक समय के बाद रुक जाती है.
अगर बकरों के खान-पान में थोड़ा सा बदलाव किया जाए और उन्हें नेपियर घास के साथ दलहनी फसल जैसे लोबिया मिलाकर दी जाए तो उनके शरीर में मांस तेजी से बढ़ने लगता है. सर्दियों के मौसम में अक्सर हरे चारे की भारी कमी हो जाती है. जिससे पशु कमजोर होने लगते हैं. जब पशुओं को कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का सही संतुलन मिलता है. तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है और वे कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं.
नेपियर घास से मिलती है एनर्जी और कार्बोहाइड्रेट
पशुओं की डेली डाइट में एनर्जी की जरूरत को पूरा करने के लिए नेपियर घास को सबसे बढ़िया ऑप्शन माना जाता है. यह एक ऐसी घास है जिसे खेत में एक बार लगा दिया जाए तो यह कई सालों तक लगातार हरा और ताजा चारा देती रहती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत तेजी से बढ़ती है और इसमें फाइबर और कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है.
यह बकरों को दिनभर एक्टिव रखने और उनके शरीर को जरूरी ताकत देने का काम करते हैं. हालांकि बहुत से किसान यह गलती कर बैठते हैं कि वे सिर्फ नेपियर घास को ही एकमात्र चारा मानकर अपने पशुओं को खिलाते रहते हैं. ऐसा करने से पशुओं को सभी जरूरी पोषक तत्व एक साथ नहीं मिल पाते.
क्योंकि अकेली नेपियर घास शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा नहीं कर सकती. बकरों के लिए कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ प्रोटीन और मिनरल्स का होना भी उतना ही जरूरी होता है. यह घास सूखे और खराब मौसम को भी सह लेती है. जिससे किसानों को कभी भी चारे की तंगी का सामना नहीं करना पड़ता और उनके पशु हमेशा तंदुरुस्त बने रहते हैं.

बकरे के शरीर की ग्रोथ अच्छी होती है
बकरे के शरीर में मांस की बढ़ोतरी और हड्डियों की मजबूती के लिए सिर्फ कार्बोहाइड्रेट काफी नहीं होता. बल्कि इसके साथ हाई क्वालिटी के प्रोटीन की भी जरूरत होती है. इस कमी को दूर करने के लिए नेपियर घास के साथ लोबिया की फसल उगाना सबसे सही तरीका है. लोबिया एक पौष्टिक दलहनी चारा है जो प्रोटीन, विटामिन्स और दूसरे मिनरल्स का नैचुरल सोर्स माना जाता है.
जब पशुओं को नेपियर घास के साथ लोबिया मिलाकर खिलाया जाता है. तो यह कॉम्बिनेशन एक परफेक्ट बैलेंस डाइट बन जाता है. इससे बकरों की पाचन शक्ति में सुधार होता है और वे जो भी खाते हैं. वह उनके शरीर में पूरी तरह से लगता है. सर्दियों के दिनों में जब चारों तरफ पौष्टिक चारे का अकाल सा रहता है, तब अगर किसानों ने पहले से नेपियर और लोबिया की तैयारी कर रखी है, तो उनके बकरे कभी कमजोर नहीं होते.

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सही चारा बकरी पालन में दिलाएगा मुनाफा
बकरी पालन के इस पूरे कारोबार में सफलता का सारा दारोमदार सही पोषण और खान-पान के मैनेजमेंट पर ही टिका होता है. अगर किसान पुरानी और पारंपरिक सोच को छोड़कर थोड़ा सा वैज्ञानिक नजरिया अपना लें. तो पशुओं की सेहत में चमत्कारिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
नेपियर घास और लोबिया का यह कांबिनेशन न सिर्फ चारे के खर्च को कम करता है. बल्कि पशुओं को अंदर से मजबूत भी बनाता है. सही और संतुलित आहार मिलने से बकरियों की प्रजनन क्षमता को भी बढ़ाता. जिससे स्वस्थ और तगड़े बच्चों का जन्म होता है
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