Milk Adulteration Penalty: सुबह की चाय हो या बच्चों के लिए दूध, लगभग हर भारतीय घर में रोज इसकी जरूरत पड़ती है. लेकिन क्या हो, जब आप जिस दूध को शुद्ध समझकर खरीद रहे हैं, उसमें पानी मिलाया गया हो? दूध में पानी मिलाने से उसकी मात्रा तो बढ़ जाती है, लेकिन दूध में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है. साथ ही ये यह ग्राहकों के साथ धोखा भी है.
ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि, अगर कोई दूध में पानी मिलाकर बेचते पकड़ा जाए, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और क्या उसे जेल भी हो सकती है? आइए, जानते हैं कि इस मामले में कानून क्या कहता है.
कितनी हो सकती है सजा और जुर्माना?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 59 के तहत असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने पर सजा का प्रावधान है.
- मिलावटी दूध से किसी को चोट नहीं पहुंचती, तो तीन महीने तक की जेल और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
- अगर किसी को सामान्य से गंभीर चोट पहुंचती है, तो सजा और जुर्माना बढ़ सकता है.
- गंभीर चोट के मामले में छह साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
- अगर किसी की मौत हो जाती है, तो कम से कम सात साल की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा.
- साथ ही कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है.
हालांकि, ये सजाएं असुरक्षित खाद्य पदार्थ से जुड़े मामलों के लिए हैं. दूध में पानी मिलाने के हर मामले में यही सजा अपने आप लागू नहीं हो जाती. कार्रवाई दूध की जांच, मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होती है.
दूध में मिलावट कैसे पहचानें
दूध में पानी की मिलावट का अंदाजा लगाने के लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं. हालांकि, इनसे मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं होती. जैसे, साफ और चिकनी ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालें. शुद्ध दूध धीरे बहता है और पीछे सफेद लकीर छोड़ सकता है, जबकि पानी मिला दूध जल्दी बह सकता है. हालांकि, दूध में फैट की मात्रा और उसकी किस्म के कारण भी ऐसा हो सकता है. इसलिए केवल घरेलू तरीकों के भरोसे दूध को शुद्ध न मानें. मिलावट की सही जांच के लिए फूड टेस्टिंग किट या मान्यता प्राप्त लैब की मदद लें.
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मिलावट का शक हो तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि, दुकानदार या दूध सप्लायर मिलावटी दूध बेच रहा है, तो आप इसकी शिकायत अपने जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग में कर सकते हैं. खाद्य सुरक्षा अधिकारी दूध का नमूना लेकर जांच के लिए भेज सकते हैं. जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
इसलिए दूध बेचने वालों को उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए पानी मिलाने से बचना चाहिए. वहीं, ग्राहकों को भी मिलावट का संदेह होने पर खुद फैसला सुनाने के बजाय संबंधित विभाग को जानकारी देनी चाहिए.
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