देश में बहुत सी ऐसी पारंपरिक फसलें और पौधे मौजूद हैं. जिनके अनगिनत फायदे हैं लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से लोग उनका पूरा फायदा नहीं उठा पाते. ऐसी ही एक शानदार फसल सनई की है. जिसे लोग आमतौर पर सिर्फ हरी खाद और जूट जैसी चीज मानकर छोड़ देते हैं.
लेकिन आपको बता दें इस फसल के पौधे का हर एक हिस्सा किसी न किसी बड़े काम में आता है. खेत की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने से लेकर इसके पीले फूलों की स्वादिष्ट सब्जी बनने तक सनई की खेती अब किसानों के लिए कमाई का एक बेहतरीन जरिया बन चुकी है.
बाजार में इसके फूलों की जबरदस्त मांग रहती है और लोग इन्हें काफी ऊंचे दामों पर खरीदते हैं. इसके अलावा इसके मजबूत तनों से निकलने वाले रेशे से बहुत ही टिकाऊ और मजबूत रस्सियां तैयार की जाती हैं. चलिए आपको बताते हैं कैसे की जाती है इस फूल की खेती किन बातों का रखना होता होता है ध्यान.
सनई के पीले फूलों की सब्जी
जब सनई के खेतों में पीले रंग के फूल खिलते हैं. तो वह काफी खूबसूरत नजर आते हैं. बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि इन खूबसूरत फूलों की लज़ीज़ सब्जी भी बनाई जाती है. जो खाने में बेहद स्वादिष्ट और सेहतमंद होती है. गांव में इसे लोग इस सब्जी को बड़े चाव से खाते हैं. बाजार में भी इन फूलों की अच्छी खासी कीमत मिल जाती है.
सेहत के लिहाज से बात करें तो सनई के इन फूलों में फाइबर, कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने का काम करता है. डॉक्टर भी मानते हैं कि इसका सेवन करने से डाइजेशन प्रोसेस सही रहती है और कई तरह की हेल्थ से जुड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं. पारंपरिक खेती के साथ-साथ अगर किसान इसकी फसल को उगाते हैं तो अच्छी कमाई कर सकते हैं.

रस्सियां बनाने के लिए इस्तेमाल
सनई की फसल का सिर्फ फूल ही नहीं बल्कि इसका तना भी बहुत काम की चीज साबित होता है. जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है और पौधे बड़े हो जाते हैं. तब इसके तनों से रेशा निकाला जाता है. जूट की तरह ही सनई के तनों को भी पानी में कुछ दिनों के लिए गलाया जाता है जिससे उसका रेशा आसानी से अलग किया जा सके. जब यह प्रोसेस पूरी हो जाती है. तो इन रेशों से इतनी मजबूत और टिकाऊ रस्सियां बनाई जाती हैं जो सालों-साल चलती हैं और जल्दी खराब नहीं होती हैं.
गांव के लोग घरेलू कामों से लेकर खेती-बारी के भारी-भरकम सामान को बांधने के लिए इन्हीं रस्सियों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. बाजार में इन प्राकृतिक रेशों से बनी चीजों की डिमांड हमेशा बनी रहती है क्योंकि ये सिंथेटिक प्लास्टिक की रस्सियों से कहीं ज्यादा मजबूत होती हैं. इससे भी किसानों की एक्स्ट्रा कमाई होती है.

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कैसे की जाती है इसकी खेती?
अगर आप भी सनई की खेती करना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले सही समय और मौसम का चुनाव करना बहुत जरूरी होता है. इसकी बुवाई आमतौर पर बरसात के मौसम की शुरुआत यानी जून और जुलाई के महीने में की जाती है. जब हल्की बारिश से खेत की मिट्टी में नमी बन जाती है. खेत तैयार करने के लिए एक या दो बार अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लिया जाता है और फिर इसके बीजों की बुवाई कतारों में की जाती है.
इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे उगने के लिए बहुत ज्यादा उपजाऊ जमीन और महंगे फर्टिलाइजर की जरूरत नहीं पड़ती है, और सामान्य मिट्टी में भी आसानी से पनप जाती है. बुवाई के बाद पौधों की शुरुआती ग्रोथ के दौरान एक-दो बार हल्की निराई-गुड़ाई कर देनी चाहिए जिससे घास-फूस खत्म हो जाए और पौधों को पूरा पोषण मिल सके.
कुछ ही हफ्तों में पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं और उन पर फूल आने लगते हैं जिन्हें समय पर तोड़कर सब्जी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा तनों से रेशा निकालने या हरी खाद के रूप में उपयोग करने के लिए किसान अपनी जरूरत के हिसाब से फसल की कटाई का सही समय तय कर सकते हैं.
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