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कैसे होती है कमल की खेती, खेत से लेकर बाजार तक कितना मुनाफा?

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ABP News
August 18, 20263 min read
कैसे होती है कमल की खेती, खेत से लेकर बाजार तक कितना मुनाफा?

भारत में पारंपरिक फसलों जैसे धान और गेहूं की खेती में जब लागत बढ़ने लगी, तो देश के किसानों ने बागवानी और नकदी फसलों की खेती करना शुरू कर दिया हैं. इसी में से एक है कमल की खेती. पहले जहां कमल सिर्फ प्राकृतिक तालाबों या झीलों में ही उगता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक की मदद से किसान इसे अपने खेतों में उगाकर बंपर कमाई कर रहे हैं. कमल एक ऐसी अनोखी फसल है जिसका हर एक हिस्सा फूल, पत्तियां, जड़ और बीज बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है. आइए जानते है इसकी खेती कैसे की जाती है और किसान इससे भारी मुनाफा कमा सकते हैं.

कैसे करें खेती की तैयारी?

कमल की खेती के लिए पारंपरिक खेतों को एक छोटे तालाब जैसा बनाना पड़ता है. इसकी खेती के लिए चिकनी या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जो लंबे समय तक पानी को रोक कर रख सके. खेत के चारों तरफ 3 से 4 फीट ऊंची और मजबूत मेड़ बनाई जाती है. इसके बाद खेत को करीब 1.5 से 2 फीट तक गहरा खोदा जाता है. खेत में गोबर की खाद और जैविक उर्वरक डालने के बाद उसमें 1 से 1.5 फीट तक पानी भर दिया जाता है. मिट्टी जब पूरी तरह कीचड़ का रूप ले लेती है, तब यह रोपाई के लिए तैयार हो जाती है.

रोपाई और देखभाल

कमल की रोपाई बीजों द्वारा भी होती है, लेकिन कंद द्वारा खेती करना सबसे सफल माना जाता है क्योंकि इससे पौधे जल्दी तैयार होते हैं. कमल के पौधों की रोपाई का सबसे सही समय फरवरी से अप्रैल के बीच माना जाता है क्योंकि इस दौरान मौसम में हल्की गर्माहट होती है जो इसकी ग्रोथ के लिए काफी जरूरी है. इसके अलावा कमल की फसल को बहुत ज्यादा कीटनाशकों की जरूरत नहीं होती. बस समय-समय पर खेत में पानी का स्तर 1 फीट बनाए रखना होता है. रोपाई के मात्र 3 से 4 महीने बाद ही इसमें फूल आने शुरू हो जाते हैं.

एक फसल से चार तरह का मुनाफा

कमल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसान को कभी घाटा नहीं होने देती क्योंकि इसके सभी हिस्से बाजार में बिकते हैं. धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों विशेषकर दीवाली और शादियों में कमल के फूलों की भारी मांग रहती है और एक फूल बाजार में 10 से 25 रुपये तक आसानी से बिक जाता है.

साथ ही इसके जड़ो का उपयोग सब्जी व अचार बनाने के लिए भी किया जाता है. इसलिए बाजार में इसकी जड़ों की कीमत 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक होती है. साथ ही फूलों के झड़ने के बाद जो बीज बचते हैं, उन्हें कमल गट्टा कहते हैं, इनका उपयोग पूजा-पाठ और दवाइयां बनाने में होता है, इसके साथ ही इन बीजों को भूनकर सेहतमंद मखाना तैयार किया जाता है, जिसकी वैश्विक बाजार में भारी मांग है.

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खेत से लेकर बाजार तक का मुनाफा

अगर आप एक एकड़ खेत में कमल की खेती शुरू करते हैं, तो शुरुआत में खेत की खुदाई, कंद खरीदने और लेबर को मिलाकर करीब 35,000 से 50,000 रुपये तक की लागत आती है. वहीं मुनाफे की बात करें, तो एक एकड़ से सालभर में लगभग 30,000 से 40,000 कमल के फूल प्राप्त किए जा सकते हैं. इसके फुलों, कमल ककड़ी और बीजों को मिलाकर, तमाम खर्चे निकालने के बाद एक एकड़ खेत से किसान सालभर में 3.5 लाख से 5 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.

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