आजकल घर पर सब्जियां उगाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. लोग बालकनी, छत या घर के छोटे से खाली हिस्से में टमाटर, मिर्च और धनिया जैसी सब्जियां उगा रहे हैं. अगर आप भी अपने किचन गार्डन में कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो कुंदरू का पौधा लगा सकते हैं. इसकी बेल एक बार अच्छी तरह बढ़ने लगे तो लंबे समय तक इससे सब्जी मिल सकती है.
कुंदरू को कई जगह टिंडोरा और आइवी गॉर्ड के नाम से भी जाना जाता है. इसकी सब्जी खाने में स्वादिष्ट होती है और इसे कई तरीकों से बनाया जा सकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि कुंदरू की बेल को घर पर भी आसानी से मैनेज किया जा सकता है.
इसके लिए आपके पास बड़ा गार्डन होना जरूरी नहीं है. सही साइज का गमला, अच्छी मिट्टी, धूप और बेल को चढ़ने के लिए सपोर्ट मिल जाए तो छत या बालकनी में भी इसे उगाया जा सकता है. बस शुरुआत करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा.
बीज से नहीं पौधे या कटिंग से करें शुरुआत
अगर आप पहली बार घर पर कुंदरू उगा रहे हैं तो नर्सरी से अच्छी और हेल्दी बेल या पौधा लेना आसान ऑप्शन हो सकता है. इसे कटिंग से भी तैयार किया जा सकता है. घर पर लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां पौधे को रोज अच्छी धूप मिल सके. कुंदरू बेल वाली सब्जी है. इसलिए पौधा बढ़ने के साथ इसे फैलने के लिए भी जगह चाहिए. इसे छोटे गमले में लगाने के बजाय बड़ा और गहरा कंटेनर चुनना बेहतर रहेगा.
गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए. मिट्टी तैयार करते समय गार्डन की मिट्टी के साथ कम्पोस्ट या अच्छी तरह तैयार ऑर्गेनिक खाद मिला सकते हैं. मिट्टी ऐसी रखें जिसमें पानी आसानी से निकल जाए. पौधा लगाने के बाद हल्का पानी दें. शुरुआत में मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें, लेकिन हर समय बहुत ज्यादा गीला रखना भी सही नहीं है.

बेल को दें सपोर्ट और धूप का भी रखें ध्यान
कुंदरू का पौधा बेल के रूप में तेजी से फैलता है. इसलिए पौधा लगाने के साथ ही उसके लिए सपोर्ट का इंतजाम करना बेहतर है. गमले के पास जाली, रस्सी या मजबूत स्टैंड लगाया जा सकता है. इससे बेल ऊपर की तरफ बढ़ेगी और बालकनी या छत पर ज्यादा जगह भी नहीं घेरेगी. सही सपोर्ट मिलने से पौधे को मैनेज करना भी आसान हो जाता है.
कुंदरू की अच्छी ग्रोथ के लिए धूप जरूरी है. इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां कई घंटे सीधी धूप आती हो. पानी देते समय मिट्टी की कंडीशन चेक करें. ऊपर की मिट्टी सूखी लगे तो जरूरत के हिसाब से पानी दिया जा सकता है. गर्मी के दिनों में मिट्टी जल्दी सूख सकती है. इसलिए पौधे पर नजर रखें. समय-समय पर सूखे और खराब पत्ते भी हटा सकते हैं. कुछ हफ्तों बाद ऑर्गेनिक खाद देने से पौधे को जरूरी न्यूट्रिशन मिलता रहेगा.
लंबे समय तक मिल सकती है सब्जी
कुंदरू की खासियत यह है कि यह कई दूसरी मौसमी सब्जियों की तरह एक फसल के बाद तुरंत खत्म नहीं होता. यह बारहमासी बेल है और सही मौसम और देखभाल मिलने पर कई साल तक बढ़ सकती है. पौधा अच्छी तरह सेट होने के बाद इसमें फूल आते हैं और फिर छोटे हरे कुंदरू बनने शुरू होते हैं. सब्जी के लिए इन्हें नरम और हरे रहने पर तोड़ना बेहतर होता है.
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सेहत के लिए कुंदरू के फायदे
कुंदरू सिर्फ एक स्वादिष्ट सब्जी ही नहीं है बल्कि यह औषधीय गुणों का खजाना है. जो हमारे शरीर को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो पेट से जुड़ी दिक्कतों को दूर रखते हैं.
आज के समय में जो लोग डायबिटीज यानी शुगर की समस्या से परेशान हैं उनके लिए कुंदरू का सेवन करना बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता है. इसके अलावा इसमें मौजूद आयरन और मिनरल्स शरीर की कमजोरी को दूर करके खून की कमी को पूरा करते हैं और इम्युनिटी को भी बूस्ट करते हैं.

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