खेती में कम लागत लगाकर तगड़ा मुनाफा कमाने का सपना हर किसान देखता है. और सब्जी की खेती इसमें हमेशा आगे रहती है. अगर आप भी पारंपरिक फसलों से हटकर कुछ ऐसा उगाना चाहते हैं जो कम समय में भारी रिटर्न दे तो भिंडी की खेती आपके लिए सबसे बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती है. बाजार में भिंडी की मांग पूरे साल बनी रहती है. जिससे किसानों को इसके दाम भी हमेशा शानदार मिलते हैं.
अगर सही प्लानिंग और बढ़िया क्वालिटी के बीजों को लगाया जाए तो किसान एक एकड़ जमीन से लाखों रुपये का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं. तो जान लीजिए कि एक एकड़ में भिंडी की खेती करके कैसे बंपर पैदावार ली जा सकती है और इससे कुल कितना फायदा मिलता है. इस नकदी फसल की खेती से कम समय में बंपर आमदनी हासिल करने के लिए किसानों को कुछ बातों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है.
मिट्टी की तैयारी और बुआई का सही तरीका
भिंडी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की उपजाऊ क्षमता और उसकी सही जुताई पर खास ध्यान देना होता है. भिंडी की फसल के लिए बढ़िया जल निकास वाली दोमट और भुरभुरी मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. जिसका पीएच मान 7.0 से 7.8 के बीच होना चाहिए. खेत की तैयारी के वक्त मिट्टी की दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई करके पाटा लगा लेना चाहिए जिससे जमीन एकदम समतल और भुरभुरी हो जाए.
इसकी बुआई फरवरी से मार्च के आखिरी सप्ताह तक गर्मी के मौसम के लिए की जाती है. जबकि बरसात के मौसम में इसकी बुआई जून से जुलाई के दौरान होती है. बीज हमेशा प्रमाणित और उन्नत किस्म के ही चुनें तथा कतार से कतार की दूरी लगभग 40 से 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए जिससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. सही दूरी पर बीज लगाने से पौधों का विकास बेहतरीन तरीके से होता है और पैदावार बढ़ती है.
यह किस्में दिलाती है अच्छी पैदावार
खेती से अच्छी पैदावार तभी मिलती है जब पौधों को समय पर सही पोषक तत्व और पानी मिले. भिंडी की पाॅपुलर और उन्नत किस्मों में यह किस्में शामिल हैं.
- पूसा ए-4
- परभनी क्रांति
- पंजाब-7
- अर्का अभय
- वर्षा उपहार
एक एकड़ में लागत
अब बात करते हैं सबसे जरूरी हिस्से यानी एक एकड़ में आने वाली कुल लागत की जो हर किसान के लिए जानना बहुत जरूरी है. अगर आप एक एकड़ जमीन पर की खेती करते हैं, तो कुल लागत लगभग 30000 से 45000 रुपये के बीच आती है.
इस अनुमानित लागत में अच्छी क्वालिटी वाले प्रमाणित बीजों का खर्च, खेत की जुताई और पाटा लगवाने का खर्च, गोबर की सड़ी हुई खाद और केमिकल फर्टिलाइजर जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की खरीद शामिल होती है.

इसके अलावा फसल की नियमित सिंचाई, खरपतवार रोकने के लिए निराई-गुड़ाई, और कीट और रोगों से बचाने के लिए जरूरी दवाओं का खर्च भी इसी में जोड़ा जाता है. अगर आप मजदूरी का खर्च भी जोड़ लें तो यह कुल रकम आपको फसल लगाने के समय करना पड़ता है. जो कुल मुनाफे के मुकाबले काफी कम साबित होता है.
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कितना हो सकता है कुल मुनाफा
मुनाफे की बात करें तो भिंडी की खेती किसानों को अच्छे पैसे दे जाती है. अगर किसान वैज्ञानिक तरीकों से उन्नत किस्मों की खेती करते हैं. तो एक एकड़ जमीन से लगभग 5 लाख रुपये तक की कुल इनकम आसानी से हो जाती है. इसमें कुल लागत जैसे बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी को अगर निकाल भी दिया जाए.

तो किसान को कम से कम साढ़े तीन लाख रुपये तक की बचत हाथ लगती है. भिंडी की तुड़ाई बुआई के करीब 50 से 60 दिन बाद शुरू हो जाती है और यह कई हफ्तों तक लगातार चलती है. जिससे किसानों की जेब में रेगुलर पैसे आते रहते हैं.
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