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गन्ने में लाल सड़न रोग, जानें कैसे बचाएं अपनी फसल

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ABP News
September 29, 2026•3 min read
गन्ने में लाल सड़न रोग, जानें कैसे बचाएं अपनी फसल

गन्ने की खेती भारत में विशेष रुप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में होती है. बारिश के दिनों में गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग मुख्य रुप से देखा जाता है. यह गन्ने में होने वाली एक बेहद खतरनाक फंगल बीमारी है. जिसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है. यह कोलेलेटोट्रैचिम फाल्केटम नामक फफूंद के कारण होता है. यह रोग गन्नों में तेजी से फैलता है. सही समय पर उपचार न मिलने से यह पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है.

यदि अगर यह रोग पड़ोस के खेत में है, तो यह पानी के बहाव से आपके खेत में आकर आपकी फसल को भी खराब कर सकता है. ऐसे में आइए जानतें है लाल सड़न रोग बीमारी की सही पहचान, लक्षण और उपचार के बारे में जरुरी जानकारी.

क्या होता है लाल सड़न रोग?

लाल सड़न रोग गन्ने में फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है. यह रोग इतनी तेजी से फसल में फैलता है कि सही समय पर पहचान न करने से पूरी फसल इससे प्रभावित हो जाती है. यह गन्नों में होने वाला एक प्रकार का फंगल इन्फेक्शन है, जो कोलेलेटोट्रैचिम फाल्केटम की वजह से होता है. इसमें गन्ने के अंदर का गुदा लाल होने लगता है और उसमें से बदबू आने लगती है.

कैसे पहचाने इस रोग को?

लाल सड़न रोग को शुरुआत में पहचान ने से गन्ने की फसल को बचाया जा सकता है. गन्नों में लाल सड़न रोग लगने से गन्ने की तीसरी-चौथी पत्तियां पीली पड़ने लगती है और पूरा गन्ना सूखने लगता है. रोग से प्रभावित होने पर गन्ने में लाल फफूंद दिखाई देती है, जिसमें बीच-बीच में सफेद धब्बे नजर आते है. वहीं गन्नों में से शराब जैसी बदबू आने लगती है.

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कैसे रोकें इस रोग को?

यह बीमारी एक फंगल इन्फेक्शन है, जिसका कोई इलाज नहीं है. हालांकि सही समय पर कुछ सावधानी और बचाव कर के आप इस रोग को फैलने से रोक सकते हैं. अपनी फसल के गन्नों को इस बीमारी से बचाने के लिए गन्ने की बुवाई के समय ही स्वस्थ गन्ने के तने का चयन करें. वहीं आप गन्नों की बुवाई से पहले ही उन पर फंगल इन्फेक्शन की दवा का उपयोग कर सकते हैं. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी संक्रमित खेत का पानी आपके खेत में न आएं.

मिट्टी की करें जुताई

लाल सड़न रोग से बचने के लिए गन्ने की बुवाई करने से पहले खेत की मिट्टी की अच्छी तरह जुताई करें. खासकर गर्मी के मौसम में ऐसा करना बेहद फायदेमंद होती है. इसकी यह वजह है कि मिट्टी की जुताई करने से उसमें पल रहे जीवाणु ऊपर आ जाते हैं और तेज धूप की वजह से नष्ट हो जाते हैं.

फसल चक्र को अपनाएं

एक ही खेत में बार-बार गन्ने की फसल उगाने की बजाय दूसरी फसल को भी उगाएं. ऐसा करने से मिट्टी में रहने वाले जीवाणु को पौषक तत्व नहीं मिल पाते और वे जल्दी मर जाते हैं. वहीं दूसरे फसल की तैयारी करने वाले खाद के उपयोग से वे जीवित नहीं रह पाते है. जिससे फसल प्रभावित होने का खतरा कम हो जाता है.

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