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धान की फसल पर पीले धब्बे, इस रोग की दस्तक

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ABP News
August 23, 20264 min read
धान की फसल पर पीले धब्बे, इस रोग की दस्तक

धान की रोपाई के बाद जब पौधे हरे-भरे होकर बढ़ रहे होते हैं. इस दौरान कई बार खेतों में अचानक पौधों का रंग तेजी से बदलने लगता है. अगर आपको भी अपनी धान की फसल की पत्तियों पर हल्के पीले, कत्थई रंग के अजीब धब्बे दिखाई दे रहे हैं. तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें. यह धान की फसल में लगने वाले सबसे खतरनाक खैरा रोग की दस्तक हो सकती है. अक्सर किसान इसे मामूली पीलापन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.

लेकिन धीरे-धीरे यह बीमारी पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लेती है. समय रहते अगर इसकी पहचान और इलाज न किया जाए. तो पौधों की ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है. तने कमजोर पड़ जाते हैं और कल्ले भी नहीं फूटते. नतीजतन फसल की कुल पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक की भारी गिरावट आ सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह रोग क्यों फैलता है इसके मुख्य लक्षण क्या हैं और इससे फसल को कैसे बचाया जा सकता है.

खैरा रोग के शुरुआती लक्षण

खैरा रोग लगने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी में जिंक की भारी कमी होना है. जब जमीन में जिंक की कमी होती है. तो धान की रोपाई के 15 से 20 दिन बाद पौधों की निचली पत्तियों पर हल्के पीले रंग के धब्बे उभरने लगते हैं. जैसे-जैसे वक्त बीतता है यह पीले धब्बे गहरे कत्थई और लाल-भूरे रंग में बदलने लगते हैं. पत्तियां सिरों से सूखकर सिकुड़ने लगती हैं.

जिससे पूरा पौधा एकदम बेजान और कमजोर दिखने लगता है. अगर आप इससे प्रभावित ऐसे किसी पौधे को जड़ से उखाड़कर ध्यान से देखेंगे. तो उसकी जड़ें भी सामान्य सफेद होने के बजाय भूरी नजर आएंगी. खेत में जगह-जगह पौधों के गोल दायरे में सूखना भी इस बात का साफ संकेत है कि जमीन में जिंक का स्तर काफी नीचे गिर चुका है और पौधों को तुरंत मदद चाहिए.


जिंक सल्फेट और चूने का घोल असरदार

जैसे ही खेत में खैरा रोग के लक्षण नजर आएं. बिना कोई देर किए तुरंत जिंक का छिड़काव करना चाहिए. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके लिए प्रति एकड़ 1 किलोग्राम जिंक सल्फेट 21% और 500 ग्राम बुझा हुआ चूना लेकर उसे 100 से 150 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह घोल लें. अगर किसी वजह से बुझा हुआ चूना तुरंत न मिल पाए तो आप चूने की जगह पर 1 से 2 किलोग्राम यूरिया मिलाकर भी यह घोल तैयार कर सकते हैं.

इस तैयार मिश्रण का छिड़काव तेज धूप ढलने के बाद यानी सुबह या शाम के ठंडे मौसम में फसल पर अच्छी तरह करें. अगर खेत में रोग का असर बहुत ज्यादा फैला हुआ है. तो पहला स्प्रे करने के ठीक 10 से 12 दिन बाद दूसरा छिड़काव जरूर करें. इससे पौधे तेजी से रिकवर होकर दोबारा पूरी तरह हरे-भरे हो जाते हैं.


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दोबारा न लगे खैरा रोग इसके लिए अपनाएं यह टिप्स

खैरा रोग को दोबारा खेत में पनपने से रोकने के लिए जमीन की तैयारी के वक्त ही कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है. अगली बार जब भी आप धान की रोपाई की योजना बनाएं तो खेत की आखिरी जुताई के समय ही प्रति एकड़ 10 से 12 किलोग्राम जिंक सल्फेट मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें. इससे नए पौधों को रोपाई के पहले दिन से ही जरूरी पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है. इसके अलावा खेत में लगातार धान और गेहूं की फसल लगाने के बजाय फसल चक्र अपनाएं और बीच में दलहनी फसलें जरूर उगाएं.

खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, कंपोस्ट और ढैंचा जैसी हरी खाद का इस्तेमाल करने से मिट्टी की सेहत सुधरती है और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है. इसके अलावा समय-समय पर अपने खेत की मिट्टी जरूर चेक करवाएं जिससे जरूरत के अनुसार सही खाद डालकर अच्छी उपज हासिल की जा सके.

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