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किसानों में खुशी की लहर, रबी की फसल के लिए सरकार ने जारी किए 1082 करोड़ रुपये

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ABP News
September 30, 2026•4 min read
किसानों में खुशी की लहर, रबी की फसल के लिए सरकार ने जारी किए 1082 करोड़ रुपये

देश के करोड़ों के लिए सरकार बहुत सी योजनाएं चलाती है. जिनका सीधा फायदा किसानों को पहुंचता है. देश में रबी का सीजन लगभग शुरू हो चुका है. ऐसे में खेतों की तैयारी के लिए पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. किसानों की इसी परेशानी को समझते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी अभियान की तैयारियों के बीच देश के 10 राज्यों के लिए कुल 1082 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड जारी कर दिया है.

इस आर्थिक मदद के मिलने से राज्यों को बीज, खाद और सिंचाई से जुड़े इंतजाम करने में बहुत आसानी होगी. चलिए आपको बताते हैं कि इस नए मास्टर प्लान के तहत किस राज्य को कितना हिस्सा मिला है और रबी सीजन की बंपर पैदावार के लिए सरकार की ओर से और किन चीजों के लिए मदद दी जा रही है जान लीजिए पूरी खबर.

किन राज्यों मिला कितना फंड?

सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत देश के 10 चुनिंदा राज्यों को पैसों के स्वीकृति पत्र सीधे मंच पर सौंपे हैं. इस लिस्ट में पश्चिम बंगाल को सबसे ज्यादा 290 करोड़ रुपये मिले हैं. इसके अलावा हरियाणा के लिए 198 करोड़, छत्तीसगढ़ के लिए 181 करोड़ और अरुणाचल प्रदेश के लिए 154 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.

बिहार के खाते में 114 करोड़ और कर्नाटक के लिए 104 करोड़ रुपये आए हैं. वहीं मिजोरम को 75 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़, झारखंड को 58 करोड़ और पंजाब के किसानों के लिए 43 करोड़ रुपये का फंड तय किया गया है.


दलहन की खेती पर जोर

सरकार ने इस बार रबी सीजन के लिए स्मार्ट प्लानिंग तैयार की है. अक्सर किसान धान काटने के बाद खेत को खाली छोड़ देते हैं. लेकिन सरकार चाहती है कि इस खाली समय का पूरा फायदा उठाया जाए. प्लान यह है कि किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों तक ही सीमित न रहें. बल्कि खेत खाली होते ही उसमें तुअर, उड़द और मसूर जैसी दलहन फसलों की बंपर पैदावार लें. इससे खेत की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है और मुनाफा भी तगड़ा होता है. इसके साथ ही खेत की मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सिर्फ सॉइल हेल्थ कार्ड देखकर ही सही खाद और उर्वरक डालने की सलाह दी जा रही है.

नकली खाद-बीज पर एक्शन

सबसे बड़ी और काम की बात यह है कि किसानों को ठगने वाले दुकानदारों और बिचौलियों पर सरकार का डंडा चलने वाला है. जो लोग किसानों को नकली खाद, घटिया बीज या बेकार कीटनाशक बेचकर लूटते हैं. उन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा. कई बार दुकानदार खाद के साथ जबरदस्ती कोई दूसरा सामान भी थमा देते हैं जिसे फोर्स टैगिंग कहते हैं.

अगर ऐसा किसी ने किया तो उसके खिलाफ सीधा और सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा. इसके अलावा, हर जरूरतमंद और पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने और फसल बीमा का पैसा पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे किसानों तक पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं. किसानों को कृषि सामग्री खरीदते समय बिल लेना चाहिए और पैकेट पर कंपनी, बैच नंबर और वैधता की जानकारी जांचनी चाहिए.

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मिट्टी की जांच

रबी की तैयारी के साथ खेत की मिट्टी की जांच पर भी जोर दिया गया है. सॉइल हेल्थ कार्ड देखकर किसान समझ सकते हैं कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और खाद कितनी डालनी चाहिए. जरूरत से ज्यादा खाद डालना खर्च बढ़ा सकता है और लंबे समय में मिट्टी की सेहत पर असर पड़ सकता है. सरकार के खेत बचाओ अभियान में संतुलित खाद के इस्तेमाल और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने की बात है.

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