Sugarcane Farming: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है. अब राज्य में गन्ने की 12 नई किस्मों की खेती की जा सकेगी. इनमें 4 किस्में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और लखनऊ में स्थित गन्ना शोध केंद्रों में तैयार की गई हैं. वहीं, 8 किस्मों को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है. इन किस्मों की जांच में कई की उपज पुरानी अच्छी किस्मों से ज्यादा पाई गई है. साथ ही कुछ किस्मों में गन्ने के लाल सड़न रोग से बचने की क्षमता भी मिली है.
शाहजहांपुर और लखनऊ के गन्ना शोध केंद्रों में तैयार की गई चार नई किस्मों को कई साल तक अलग-अलग जगहों और मौसम में परखा गया. इसके बाद इन्हें उत्तर प्रदेश में खेती के लिए मंजूरी दी गई. इन किस्मों के नाम को.शा. और को.लख. जैसे रखे गए हैं.
लाल सड़न रोग से बचाव में बेहतर
को.शा.23232 एक अगेती किस्म है. जांच में इसकी औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 के मुकाबले 9.44 फीसदी ज्यादा है. इसकी पेड़ी की उपज भी 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही. यह किस्म लाल सड़न रोग से बचाव के मामले में भी मजबूत पाई गई है. वहीं, को.लख.21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर रही. इसमें को.0238 के मुकाबले चीनी की मात्रा ज्यादा मिली. यह किस्म भी लाल सड़न रोग से बचाव के लिए बेहतर पाई गई है.
दो किस्मों में ज्यादा उपज का दावा
को.शा.19235 और को.शा.18232 ऐसी किस्में हैं, जिन्हें तैयार होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. को.शा.19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर रही. यह को.शा.767 के मुकाबले 21.01 फीसदी ज्यादा है. वहीं, को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.शा.767 से 26.51 फीसदी ज्यादा है. इसकी पेड़ी की उपज भी 82.06 टन प्रति हेक्टेयर रही. दोनों किस्मों में लाल सड़न रोग से बचने की अच्छी क्षमता पाई गई है.
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केंद्र की 8 किस्मों को भी मंजूरी
इन चार किस्मों के अलावा केंद्र सरकार से पहले ही मंजूर 8 और किस्मों को भी उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अपनाया गया है. इनमें को.पी.16437, को.पी.11438 और को.लख.16466 अगेती किस्में हैं, यानी ये जल्दी तैयार हो जाती हैं. वहीं को.16030, को.17018, को.18022, को.पीबी.17215 और को.पीबी.18213 ऐसी किस्में हैं, जिन्हें तैयार होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है.
किसानों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प
नई किस्मों के आने से किसानों को गन्ने की खेती के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे. किसान अपने इलाके और खेती की स्थिति के हिसाब से जल्दी या देर से तैयार होने वाली किस्मों का चुनाव कर सकेंगे. ज्यादा उपज, ज्यादा चीनी परता और रोगों से बचने वाली किस्मों से गन्ने का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इससे किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों को भी फायदा होने की उम्मीद है.
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