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खेत के बीच बत्तख क्यों छोड़ते हैं किसान, इससे धान की फसल को क्या फायदा?

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ABP News
October 5, 2026•3 min read
खेत के बीच बत्तख क्यों छोड़ते हैं किसान, इससे धान की फसल को क्या फायदा?

भारत समेत दुनिया भर के कई हिस्सों में किसान अब खेती के पारंपरिक तरीकों में बड़े बदलाव कर रहे हैं. इसी कड़ी में धान की खेती के साथ बत्तख पालन यानी इंटीग्रेटेड राइस-डक फार्मिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है. अक्सर आपने देखा या सुना होगा कि किसान पानी से लबालब भरे धान के खेतों के बीच में बत्तखों के झुंड को छोड़ देते हैं. पहली नजर में यह केवल पशुपालन जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक बेहतरीन कृषि तकनीक छिपी है. धान के खेतों में बत्तखों को छोड़ने से न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि धान की पैदावार में भी भारी बढ़ोतरी देखी जाती है.

मुफ्त में हो जाती है खेतों की निराई और गुड़ाई

धान की फसल में सबसे बड़ी समस्या खरपतवार की होती है, जिसे साफ करने में किसानों का काफी समय और पैसा खर्च होता है. जब खेत में बत्तखें छोड़ी जाती हैं, तो वे तैरते हुए खेत में उगने वाले अनचाहे खरपतवार और उनके छोटे पत्तों को खा जाती हैं. बत्तखों की खास बात यह होती है कि वे धान की मुख्य पत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं. इसके अलावा, बत्तखें जब पानी में लगातार तैरती और चलती हैं, तो उनके पैरों और चोंच की हलचल से मिट्टी लगातार खुरचती रहती है. इससे खेतों की प्राकृतिक रूप से निराई-गुड़ाई हो जाती है और जमीन की हवा सोखने की क्षमता बढ़ जाती है.

फसल को कीड़ों से बचाती हैं बत्तखें

धान के पौधों में तना छेदक, हॉपर और विभिन्न प्रकार के हानिकारक कीड़ों का हमला आम बात है. बत्तखें इन कीड़ों, उनके लार्वा और पानी में पनपने वाले घोंघों को ढूंढ-ढूंढकर अपना भोजन बना लेती हैं. इससे फसल पर लगने वाले रोगों का खतरा बहुत कम हो जाता है. इस प्राकृतिक कीट नियंत्रण के कारण किसानों को अपने खेतों में महंगे और हानिकारक रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे पर्यावरण और फसल दोनों सुरक्षित रहते हैं.

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मिलती है बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद

खेत के पानी में तैरते समय बत्तखें जो बीट करती हैं, वह धान के पौधों के लिए नाइट्रोजन और फास्फोरस से भरपूर एक उच्च गुणवत्ता वाली प्राकृतिक खाद का काम करता है. इस जैविक खाद के मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और धान के पौधे अधिक घने और शाखाओं वाले बनते हैं. इसके परिणामस्वरूप किसानों को बाजार से महंगी यूरिया या डीएपी जैसी रासायनिक खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और लागत में भारी कमी आती है.

किसानों को डबल मुनाफा और एक्स्ट्रा कमाई

इस तकनीक को अपनाने से किसानों को दोतरफा आर्थिक लाभ होता है. पहला यह कि कीटनाशक, खाद और मजदूरी का खर्च बचने से ऑर्गेनिक धान पैदा होता है, जिसकी बाजार में ऊंची कीमत मिलती है. दूसरा फायदा यह है कि बत्तखों को खेत में ही प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर प्राकृतिक भोजन मिल जाता है, जिससे बाहर से उनके दाने का खर्च शून्य हो जाता है. धान की फसल पकने तक बत्तखें भी बड़ी हो जाती हैं, जिससे उनके अंडे और मांस को बाजार में बेचकर किसान हर महीने अलग से मोटी कमाई कर सकते हैं.

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