Maharashtra Drought: महाराष्ट्र के किसानों के लिए इस साल खरीफ का मौसम बेहद मुश्किल साबित हो रहा है. कम और अनियमित बारिश के कारण कई इलाकों में सोयाबीन, कपास, मक्का और दूसरी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. राज्य सरकार ने 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया है. अब चिंता सिर्फ खराब फसल की नहीं, बल्कि अगले कई महीनों तक घर का खर्च, पशुओं का चारा और अगली फसल की तैयारी करने की भी है.
खरीफ फसल से होने वाली कमाई किसान परिवारों के लिए पूरे साल का बड़ा सहारा होती है. फसल खराब होने से इस सीजन की आमदनी तो जाती ही है, साथ ही कर्ज चुकाने और अगली बुवाई के लिए पैसा जुटाना भी मुश्किल हो जाता है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में बारिश की कमी के कारण मिट्टी में नमी भी कम है. इसका सीधा असर रबी की बुवाई पर पड़ सकता है. खासकर बारिश पर निर्भर इलाकों में गेहूं, चना, ज्वार और दूसरी रबी फसलों की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है.
चारे की कमी से पशुपालक भी परेशान
फसल खराब होने का एक बड़ा असर पशुओं के चारे पर पड़ा है. खेतों से मिलने वाला फसल अवशेष कम होने के कारण सूखे चारे का संकट बढ़ रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, मराठवाड़ा के बीड और जालना में मौजूदा चारा भंडार करीब दो महीने के लिए ही पर्याप्त है. लातूर में तो कुछ किसान पशुओं को खिलाने के लिए खड़ी गन्ने की फसल तक काट रहे हैं. यानी जिस फसल से किसान को कमाई होनी थी, वही अब पशुओं का पेट भरने में इस्तेमाल हो रही है.
पानी की कमी ने बढ़ाई मुश्किल
सूखे का असर इंसानों के साथ पशुओं पर भी पड़ रहा है. कई जगह किसान अपने पशुओं को पानी पिलाने के लिए परेशान हैं और पशुओं को बेचने तक की नौबत आ रही है. नासिक में करीब 18 लाख पशुओं के लिए चारा और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई गई है. प्रशासन चारा और पानी की व्यवस्था के विकल्प तैयार कर रहा है.

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किसानों को राहत की उम्मीद
राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का सर्वे शुरू कराया है. इसके साथ फसल कर्ज के पुनर्गठन, कृषि बिजली बिल में राहत और जमीन के राजस्व से जुड़ी रियायतों जैसे कदमों की घोषणा की गई है. सरकार ने नुकसान के आकलन के बाद किसानों को आर्थिक मदद देने की बात भी कही है.
लेकिन किसानों के सामने सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं है. खराब खरीफ के बाद घर का खर्च चलाना, पशुओं को बचाए रखना, कर्ज चुकाना और रबी की बुवाई के लिए पैसा जुटाना बड़ी चुनौती है. अगर पानी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इस संकट का असर अगले सीजन तक भी खिंच सकता है.
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