धान की कटाई का सीजन आते ही देश में पराली जलाने का मुद्दा गरमाने लगता है. लेकिन इस बार हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए एक बहुत ही फायदेमंद प्लान तैयार किया है. अब किसान पराली जलाने को मजबूर नहीं होंगे क्योंकि अब सरकार पराली के बदले उन्हें आर्थिक मदद दे रही है. हरियाणा सरकार ने ऐलान किया है कि जो किसान अपने खेतों में पराली नहीं जलाएंगे और उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करेंगे. उन्हें सरकार की तरफ से प्रति एकड़ 1200 रुपये दिये जाएंगे.
अमूमन देखने में आता था कि धान काटने के बाद खेत खाली करने की जल्दी में किसान पराली में आग लगा देते थे. जिससे पर्यावरण और हवा की सेहत दोनों खराब होती थीं. लेकिन अब इस नई पहल से किसानों पर सख्ती करने की बजाय उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा जिससे वह आधुनिक मशीनों की मदद से अवशेषों को ठिकाने लगा सकें. इस कदम से जहां एक तरफ प्रदूषण पर लगाम लगेग वहीं दूसरी तरफ किसानों की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी. चलिए आपको बताते हैं कि सरकार की यह नई योजना कैसे काम करेगी और किसानों को इसका क्या-क्या फायदा मिलने वाला है.
क्या है सरकार की यह योजना?
इस बार सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए हैं. जिला और ब्लॉक स्तर पर खास तौर पर पराली संरक्षण बल का गठन किया गया है. जिसमें पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं. कई बार ऐसा होता है कि सैटेलाइट की नजर से बचने के लिए कुछ लोग रात के अंधेरे में खेतों में आग लगा देते हैं. इस चालाकी से निपटने के लिए प्रशासन ने देर शाम और रात के वक्त गश्त को और ज्यादा तेज कर दिया है.
इसके अलावा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आसमान से ड्रोन्स के जरिए खेतों की निगरानी की जाएगी जिससे कोई भी नियम न तोड़ सके. गांवों स्तर पर नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं जो हर गतिविधि पर बारीक नजर रखेंगे. अगर इसके बावजूद कोई नियमों को ताक पर रखकर पराली जलाते पकड़ा गया. तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ-साथ जमीन के रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी.

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1200 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे
किसानों को सिर्फ कहने भर से पराली की समस्या दूर नहीं हो रही है. सरकार की ओर से सख्ती करने पर भी रिजल्ट ज्यादा बेहतर नहीं आए हैं. इसलिए उन्हें संसाधन भी मुहैया कराने होंगे. इसी बात को ध्यान में रखते हुए फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के सही इस्तेमाल के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि किसानों को दी जाएगी.
इसके अलावा हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, बेलर और रेक जैसी आधुनिक मशीनें खरीदने के लिए भारी-भरकम सब्सिडी दी जा रही है. धान की कटाई के शेड्यूल को देखते हुए इन मशीनों को अलग-अलग जिलों में आसानी से उपलब्ध कराने की भी पूरी प्लानिंग कर ली गई है.
अगर किसी छोटे किसान के पास अपनी मशीन नहीं भी हैतो वह कस्टम हायरिंग सेंटर या पास की समितियों के जरिए बहुत ही कम किराए पर ये मशीनें ले सकता है. इन मशीनों की मदद से पराली को या तो मिट्टी में वापस मिला दिया जाता है जिससे नेचुरल खाद बनती है, या फिर उसे गांठें बनाकर उद्योगों में भेज दिया जाता है.

पराली बनेगी कमाई का जरिया
हरियाणा सरकार के इस नए एक्शन प्लान के तहत पराली को अब कमाई का एक नया जरिया बनाया जा रहा है. राज्य में ऐसी कई इकाइयां और बायोमास प्लांट, एथनॉल यूनिट्स और पेपर मिलें काम कर रही हैं जो पराली खरीदती हैं. किसान अपनी पराली को बेलर मशीनों की मदद से इकट्ठा करके इन उद्योगों को बेच सकते हैं.जिससे एक्सट्रा आमदनी होती है. इसके अलावा एक बड़ा हिस्सा पशुओं के चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
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