सितंबर का महीना अपने आखिरी दौर में चल रहा है. अगर आप भी पारंपरिक फसलों से हटकर कुछ ऐसा उगाना चाहते हैं जो कम दिनों में अच्छी कमाई दे तो यह एकदम सही मौका है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक साल का यह ऐसा खास समय होता है जब तापमान में हल्की नरमी आनी शुरू हो जाती है और मिट्टी में नमी बनी रहती है. जो कि जड़ वाली यानी रूट क्रॉप्स के लिए सबसे बेहतरीन माहौल माना जाता है.
सितंबर के इन आखिरी दिनों में अगर किसान थोड़ी सी सूझबूझ दिखाकर जमीन तैयार कर लें और सही बीजों का चुनाव करें तो आने वाले कुछ ही हफ्तों में उनकी फसल बंपर पैदावार देने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाएगी. बाजार में इन फसलों की डिमांड हमेशा तगड़ी रहती है. जिससे लागत बहुत कम आती है और मुनाफा सीधा आपकी जेब में आता है. चलिए आपको बताते हैं कि वे कौन सी तीन खास जड़ वाली फसलें हैं जिन्हें इस समय लगाना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.
मूली की खेती कुछ ही हफ्तों में देगी कमाई
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम हमारी रोजमर्रा की रसोई की शान मूली का आता है, जिसकी खेती सितंबर के आखिर में करना सबसे फायदेमंद माना जाता है. मूली एक ऐसी फसल है जो महज 40 से 50 दिनों के अंदर जमीन से निकलकर बिकने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है. इस मौसम की ठंडी और सुहानी हवाओं की वजह से मूली की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है और इसका साइज और स्वाद दोनों ही बहुत शानदार निकलते हैं.
इसकी बुवाई के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम करने की जरूरत नहीं होती है. बस खेत की अच्छी तरह जुताई करके भुरभुरी मिट्टी बना लें जिससे जड़ों को फैलने में पूरी जगह मिल सके. बाजार में ताजी और सफेद मूली की डिमांड पूरे साल बनी रहती है. लेकिन सर्दियों के शुरुआती दिनों में इसकी मांग और कीमत दोनों ही आसमान छूने लगती हैं. अगर आप सही समय पर इसकी रोपाई कर देते हैं. तो यह फसल आपको तगड़ा रिटर्न देकर जाएगी.

गाजर की पैदावार के लिए बेस्ट सितंबर का महीना
सर्दियों के आते ही गाजर का हलवा और सलाद हर घर की पहली पसंद बन जाता है और बाजार में इसकी डिमांड का तो कहना ही क्या है. अगर आप सितंबर के इन आखिरी दिनों में गाजर की बुवाई कर देते हैं. तो फायदा एकदम तय है. गाजर की फसल को बढ़ने के लिए हल्की ठंडी जलवायु की जरूरत होती है. जो इस मौसम में इसे कुदरती तौर पर मिल जाती है.
इसके बीजों को बोने से पहले खेत की मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद अच्छी तरह मिला देनी चाहिए. जिससे गाजर की लंबाई और मोटाई बेहतरीन होती है. गाजर की कई उन्नत किस्में बाजार में मौजूद हैं जो तय समय पर बंपर पैदावार देती हैं और खाने में भी काफी मीठी होती हैं. जब फसल कटकर मंडी में पहुंचती है. तो किसानों को इसके दाम भी बहुत ही शानदार मिलते हैं.

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अगेती आलू की खेती
अगेती आलू की खेती सितंबर के आखिर में शुरू करना किसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होता है. जब बाजार में नए सीजन का आलू सबसे पहले पहुंचता है. तो उसकी कीमतें आसमान पर होती हैं और किसानों को अपनी फसल के दाम रिकॉर्ड तोड़ मिलते हैं. अगेती किस्म के आलू की बुवाई के लिए यह सितंबर का आखिरी हफ्ता एकदम सही माना जाता है.
क्योंकि इस समय मौसम में हल्की ठंडक और मिट्टी में नमी का सही संतुलन होता है. खेत की अच्छी जुताई करके उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद और सही उर्वरक मिलाने से कंदों की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है. आलू की फसल खेत में ज्यादा समय भी नहीं लेती और खूब पैदावार देकर पूरे साल की कमाई का रास्ता खोल देती है. अगर आप भी इस सीजन में मालामाल होना चाहते हैं. तो अगेती आलू की खेती भी आपके लिए सबसे ऑप्शन में से एक है.
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