Agriculture

मछली के साथ पालें बत्तख, एक ही जगह से होगी डबल कमाई

N
ABP News
September 25, 2026•4 min read
मछली के साथ पालें बत्तख, एक ही जगह से होगी डबल कमाई

खेती में आजकल बहुत से नए तरीके आ गए हैं. जिन्हें अपनाकर किसान कम लागत में मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. अगर आप भी फिश फार्मिंग यानी मछली पालन करते हैं या फिर करने की सोच रहे हैं. तो इस आइडिया पर गौर करिए. आजकल किसान एक ही तालाब में मछली के साथ-साथ बत्तख पालन भी कर रहे हैं. इसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग कहा जाता है. जिसमें डबल फायदा होता है. एक ही पानी एक ही जगह और मेहनत आधी लेकिन कमाई सीधे डबल.

बत्तखें पानी के ऊपर तैरती रहती हैं और उनका वेस्ट सीधा तालाब के पानी में जाता है. जो मछलियों के लिए नेचुरल खाद और पौष्टिक खुराक का काम करता है. इससे अलग से दाने और उर्वरक पर होने वाला हजारों रुपए का खर्च बच जाता है. वैज्ञानिक तरीकों से अगर इस काम को शुरू किया जाए तो किसान थोड़े ही दिनों में अच्छी कमाई कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं इस बिजनेस मॉडल को कैसे शुरू किया जा सकता है.

कैसे काम करता है यह इंटीग्रेटेड मॉडल?

जब आप तालाब में मछलियां पालते हैं. तो उनके खाने-पीने और तालाब की देखरेख में काफी खर्चा आता है. वहीं जब आप इसके साथ बत्तख पालन जोड़ देते हैं. तो खर्चा उतना ही रहता है लेकिन मुनाफा बढ़ जाता है. बत्तखें दिनभर तालाब के पानी में तैरती हैं. जिससे पानी में ऑक्सीजन का फ्लो लगातार बना रहता है और पानी प्राकृतिक रूप से साफ होता रहता है.

इसके अलावा बत्तखों का बीट मछलियों के लिए सबसे बेहतरीन और पौष्टिक ऑर्गेनिक खाद माना जाता है. इसे पाकर तालाब में छोटे-छोटे जीव और फाइटोप्लांकटन तेजी से पनपते हैं. जिन्हें मछलियां खाती हैं. यानी इससे आपको अलग से फिश फीड बहुत कम खरीदना पड़ता है. एक तरफ आपकी मछलियां तेजी से वजन पकड़ती हैं और तगड़ी ग्रोथ करती हैं. तो दूसरी तरफ बत्तखें अंडे और मांस के रूप में आपको अलग से मुनाफा देती हैं.


इस तरीके को अपनाएं

कोई भी नया बिजनेस शुरू करने से पहले उसकी पूरी जानकारी ले लेना बहुत जरूरी होता है, वरना फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है. मछली और बत्तख के इस कंबाइंड बिजनेस को शुरू करने से पहले अपने नजदीकी मत्स्य विभाग के एक्सपर्ट्स से जरूर सलाह लें. वे आपको बताएंगे कि आपके इलाके की जलवायु के हिसाब से तालाब का साइज क्या होना चाहिए. उसमें कौन सी प्रजाति की मछलियां डाली जाएं और किस नस्ल की बत्तखें इसके लिए बेस्ट रहेंगी.

आमतौर पर तालाब के ऊपर ही बत्तखों के रहने के लिए छोटे और हवादार शेड बना दिए जाते हैं. शेड की सफाई का डिजाइन ऐसा होता है कि सारा कचरा सीधे पानी में चला जाए. इसके अलावा, मछलियों और बत्तखों के खान-पान, उनकी वैक्सिनेशन और समय पर बीमारियों से बचाव की दवाइयों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है. थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर यह सेटअप तैयार कर लिया जाए तो लागत बहुत कम आती है और मुनाफा अच्छा मिलता है.


यह भी पढ़ें: खेत में कभी नहीं घुसेगा गोयरा, इन आसान तरीकों से करें बचाव

कम लागत में डबल कमाई

इस इंटीग्रेटेड फार्मिंग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मार्केट की कोई कमी नहीं रहती है. हमारे देश में ताजी मछलियों की डिमांड हमेशा आसमान पर रहती है. वहीं दूसरी तरफ बत्तख के अंडों और मीट की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है. एक ही जमीन के टुकड़े और एक ही पानी के सोर्स का इस्तेमाल करके आप एक साथ दो बड़े कमर्शियल मार्केट को टारगेट कर रहे होते हैं.

बत्तखों को पालने के लिए अलग से चारे का खर्चा भी बहुत ज्यादा नहीं होता क्योंकि वे तालाब के कीड़े-मकोड़े और छोटे जलीय पौधे भी खाकर अपना पेट भर लेती हैं. इस तरीके से ग्रामीण इलाकों के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं. अगर आप भी पारंपरिक खेती से हटकर कुछ और कमाई करने का मन बना रहे हैं. तो मछली के साथ बत्तख पालन का यह फार्मूला आपके लिए बेस्ट है.

यह भी पढ़ें: पाइनएप्पल की खेती में ये बातें ध्यान रखें, होगी बढ़िया कमाई

Topics & Tags:#Agriculture
मछली के साथ पालें बत्तख, एक ही जगह से होगी डबल कमाई | Kisan Reporter