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गेहूं की खेती में अपनाएं सहफसल का तरीका, एक साथ मिलेगा 2 फसलों का लाभ

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ABP News
October 3, 2026•3 min read
गेहूं की खेती में अपनाएं सहफसल का तरीका, एक साथ मिलेगा 2 फसलों का लाभ

Rabi Season Farming: रबी सीजन में गेहूं की बुवाई शुरू होने वाली है. ऐसे में किसान अगर सिर्फ गेहूं की खेती करने के बजाय उसके साथ दूसरी फसलों की खती शुरू करें, तो एक ही खेत से अतिरिक्त उत्पादन और कमाई का मौका मिल सकता है. इसे सहफसल खेती कहा जाता है. गेहूं के साथ सरसों, मटर, चना और मसूर जैसी फसलें ली जा सकती हैं. सही तरीके और तय लाइन अनुपात में बुवाई करने से दोनों फसलों को खेत में जगह मिलती है.

गेहूं के साथ सरसों उगाने के लिए 9:1 का अनुपात रखा जा सकता है. इसका मतलब है कि, 9 लाइन गेहूं की बुवाई के बाद 1 लाइन सरसों की बोई जाए. इस तरीके से गेहूं मुख्य फसल के रूप में खेत में रहता है और उसके साथ सरसों से भी अतिरिक्त उत्पादन लिया जा सकता है. इसका फायदा यह है कि, किसान को एक ही खेत से दो तरह की फसल मिलती है. हालांकि, बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका खेत की स्थिति के हिसाब से तय करना जरूरी है.

मटर या मसूर के साथ भी कर सकते हैं खेती

अगर गेहूं के साथ मटर या मसूर की खेती करना चाहते हैं तो 2:2 या 2:3 का लाइन अनुपात अपनाया जा सकता है. यानी दो लाइन गेहूं के बाद दो या तीन लाइन मटर या मसूर की बुवाई की जा सकती है. किसान अपने खेत की मिट्टी, पानी की उपलब्धता और बुवाई के समय को देखते हुए विकल्प चुन सकते हैं. स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर लाइन की दूरी और बीज की मात्रा तय करना बेहतर रहेगा.

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दलहन से मिट्टी को भी मिल सकता है फायदा

मटर, चना और मसूर जैसी दलहनी फसलें मिट्टी के लिए भी उपयोगी मानी जाती हैं. इनके पौधे हवा में मौजूद नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में मदद करते हैं. नाइट्रोजन पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए जरूरी पोषक तत्व है. ऐसे में गेहूं के साथ दलहन की सहफसल लेने से मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और कुछ परिस्थितियों में नाइट्रोजन वाली खाद की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, खाद की मात्रा खेत की मिट्टी और फसल की जरूरत के हिसाब से ही तय करनी चाहिए.

बीज पर मिल सकती है सरकारी मदद

दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बीज और फसल किट देने की योजनाएं भी चल रही हैं. बड़े इलाके में खेती करने वाले किसानों को कुछ मामलों में बीज पर 50 फीसदी तक सब्सिडी मिल सकती है. योजना का लाभ कैसे मिलेगा और कौन-से बीज मिल रहे हैं, इसकी जानकारी के लिए किसान अपने ब्लॉक या कृषि विभाग के दफ्तर में संपर्क कर सकते हैं. सहफसल में सिर्फ दो तरह के बीज एक साथ बो देना पर्याप्त नहीं है. लाइन का अनुपात, बुवाई का समय, बीज की मात्रा, पौधों के बीच दूरी और सिंचाई जैसी चीजों का ध्यान रखना जरूरी है.

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