Agriculture

खेत में बार बार घुस रही नील गाय? इन हैक्स से आसपास भी नहीं भटकेगी

N
ABP News
October 4, 2026•3 min read
खेत में बार बार घुस रही नील गाय? इन हैक्स से आसपास भी नहीं भटकेगी

देश के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी तैयार फसलों को आवारा पशुओं और नीलगायों से बचाना है. महीनों की कड़ी मेहनत और भारी लागत लगाकर तैयार की गई फसल को नीलगाय चंद मिनटों में रौंदकर बर्बाद कर देती हैं. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए महंगे कंटीले तार लगाना हर किसान के बजट में नहीं होता. ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों के किसानों और कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे अनोखे और बेहद सस्ते देसी हैक्स खोज निकाले हैं, जिनकी मदद से नीलगाय आपके खेतों के आसपास भी नजर नहीं आएगी.

नीलगाय के गोबर का जादुई घोल

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, नीलगाय को खेत से दूर रखने का सबसे सस्ता और जैविक तरीका खुद नीलगाय का गोबर ही है. कोई भी जंगली जानवर अपने ही मलमूत्र की तेज गंध के पास आना पसंद नहीं करता. इसके लिए किसानों को उन जगहों से नीलगाय का गोबर इकट्ठा करना होता है जहां वे झुंड में बैठती हैं.

इस गोबर को पानी में अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा घोल तैयार कर लिया जाता है. इस तैयार घोल को खेत की मेढ़ से करीब एक मीटर अंदर की तरफ फसलों पर अच्छी तरह छिड़क दिया जाता है. इस घोल की गंध सूंघते ही नीलगाय रास्ता बदल लेती हैं और खेत में प्रवेश नहीं करतीं. यह उपाय करीब 20 से 25 दिनों तक पूरी तरह असरदार रहता है.

अंडे और डिटर्जेंट पाउडर का नुस्खा

एक और बेहद लोकप्रिय और आजमाया हुआ घरेलू रिपेलेंट नुस्खा अंडे और वाशिंग पाउडर के मिश्रण से बनता है. इसके लिए लगभग दो से तीन मुर्गी के अंडों को फोड़कर उनके अंदरूनी हिस्से को 100 से 150 ग्राम डिटर्जेंट पाउडर के साथ अलग-अलग घोल लिया जाता है. बाद में इस पूरे मिश्रण को 20 से 25 लीटर पानी की टंकी में मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लेते हैं.

इस लिक्विड को स्प्रे मशीन की मदद से पूरे खेत की बाउंड्री लाइन और एंट्री पॉइंट्स पर छिड़क दिया जाता है. इस घोल से एक ऐसी अजीब गंध पैदा होती है जो नीलगायों को बिल्कुल पसंद नहीं आती. अगर वे मेढ़ के पास की फसल को खा भी लेती हैं, तो उनके मुंह का स्वाद पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिसके बाद वे दोबारा उस खेत की तरफ नहीं देखतीं.

यह भी पढ़ें: गेहूं की खेती में अपनाएं सहफसल का तरीका, एक साथ मिलेगा 2 फसलों का लाभ

मट्ठा और लहसुन का शक्तिशाली घोल

परंपरागत कृषि पद्धतियों में मट्ठे और लहसुन का इस्तेमाल भी नीलगाय को भगाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है. इस हैक को तैयार करने के लिए लगभग 4 लीटर खट्टे छाछ में आधा किलो छिला और पिसा हुआ लहसुन मिलाया जाता है. इस तेज गंध वाले मिश्रण में थोड़ी सी बालू रेत भी मिला दी जाती है.

इस पूरे घोल को किसी एयरटाइट डिब्बे में करीब 5 दिनों के लिए सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. पांच दिन बाद जब इसकी दुर्गंध अत्यधिक बढ़ जाती है, तब इसे पानी में मिलाकर खेत के चारों तरफ छिड़क दिया जाता है. लहसुन और खट्टे मट्ठे की यह तीखी गंध प्राकृतिक रूप से नीलगाय को खेत से दूर रखती है और यह फसलों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती.

यह भी पढ़ें: क्या गमले में उगा सकते हैं केसर का पौधा, इसके लिए किन चीजों की जरूरत?

Topics & Tags:#Agriculture
खेत में बार बार घुस रही नील गाय? इन हैक्स से आसपास भी नहीं भटकेगी | Kisan Reporter