भारतीय कृषि में अब किसान पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई के नए और आधुनिक तरीके अपना रहे हैं. आमतौर पर किसान अपने खेतों की मेड़ों को खाली छोड़ देते हैं या उस पर झाड़ियां उग आती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी खाली पड़ी मेंड का सही इस्तेमाल करके किसान हर साल लाखों रुपये की आमदनी कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मेड़ पर खास तरह के कीमती पेड़ और पौधे लगाकर किसान अपनी मुख्य फसल को बिना नुकसान पहुंचाए एक बड़ी रकम कमा सकते हैं.
पॉपुलर और सफेदा के पेड़ से कम समय में बंपर मुनाफा
खेत की मेड़ पर लगाने के लिए पॉपुलर और सफेदा के पेड़ सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं. इन पेड़ों की खासियत यह होती है कि ये बिल्कुल सीधे ऊपर की तरफ बढ़ते हैं, जिससे इनकी छाया खेत की फसल पर बहुत कम पड़ती है. पॉपुलर का पेड़ मात्र 5 से 7 साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है और इसकी लकड़ी का इस्तेंमाल प्लाइवुड, माचिस और कागज बनाने वाले उधोग में बहुत बड़े पैमाने पर होता है. सफेदा का पेड़ भी बहुत कम पानी और कम देखरेख में तेजी से बढ़ता है. बाजार में इन दोनों पेड़ों की लकड़ियों की मांग हमेशा बहुत ऊंची रहती है, जिससे किसानों को मेड़ से ही सीधा और मोटा मुनाफा मिल जाता है.
बांस की खेती से बाउंड्री की सुरक्षा और रेगुलर इनकम
खेत की मेड़ पर बांस लगाना भी किसानों के लिए एक बहुत ही समझदारी भरा और मुनाफे का सौदा है. बांस को हरा सोना भी कहा जाता है, क्योंकि एक बार लगाने के बाद यह कई साल तक लगातार कमाई देता रहता है. मेड़ पर घना बांस लगाने से खेत को एक मजबूत प्राकृतिक बाड़ मिल जाती है, जिससे आवारा पशु और नीलगाय खेत के अंदर घुसकर मुख्य फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं.
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औषधीय और मसाला पौधे
अगर किसान बड़े पेड़ नहीं लगाना चाहते हैं, तो वे मेड़ की खाली जगह पर औषधीय पौधे और मसालों की खेती कर सकते हैं. मेड़ के किनारों पर लेमन ग्रास, अश्र्वगंधा, शतावरी और हल्दी जैसे पौधे आसानी से उगाए जा सकते हैं. इन पौधों को बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती और ये मुख्य फसल के साथ ही मेड़ की नमी का इस्तेमाल करके तैयार हो जाते हैं. लेमन ग्रास जैसी फसलों की खुशबू से जंगली जानवर भी खेत से दूर रहते हैं. फार्मास्युटिकल और आयुर्वेदिक कंपनियां इन औषधीय पौधों को बहुत अच्छे दामों पर खरीदती हैं, जिससे किसानों को हर साल अतिरिक्त आय मिलती रहती है.
मेड़ पर पेड़-पौधे लगाने के अन्य बड़े कृषि लाभ
मेड़ पर पेड़ और पौधे लगाने से किसानों को केवल आर्थिक लाभ ही नहीं मिलता, बल्कि इससे खेत की सेहत भी सुधरती है. पेड़ों की जड़ें खेत की उपजाऊ मिट्टी को जकड़ कर रखती हैं, जिससे तेज बारिश या बाढ़ के समय मिट्टी का कटाव रुक जाता है. इसके साथ ही पेड़ों से गिरने वाली सूखी पत्तियां समय के साथ सड़कर खेत के लिए बेहतरीन जैविक खाद का काम करती हैं, जिससे मुख्य फसल की पैदावार में भी सुधार होता है.
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