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कौन सी नस्ल की भैंस देती है ज्यादा दूध, इससे कितनी कमाई?

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ABP News
October 4, 2026•3 min read
कौन सी नस्ल की भैंस देती है ज्यादा दूध, इससे कितनी कमाई?

Dairy Farming Business: गांवों में डेयरी का काम लंबे समय से कमाई का एक भरोसेमंद जरिया बना हुआ है. दूध की मांग रोज बनी रहती है, इसलिए अगर सही नस्ल के पशु और अच्छी देखभाल हो तो छोटे स्तर पर भी डेयरी शुरू की जा सकती है. अगर आपका बजट ज्यादा नहीं है और आप घर या खेत के पास से डेयरी बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो मुर्रा नस्ल की भैंस आपके लिए एक विकल्प हो सकती है.

देश में भैंस की कई नस्लें पाई जाती हैं, जिनमें जाफराबादी, मेहसाणा, सूरती, भदावरी और नीली रावी प्रमुख हैं. इनमें मुर्रा भैंस अपनी अच्छी दूध देने की क्षमता के लिए काफी लोकप्रिय है. यही वजह है कि, इसे डेयरी फार्मों में बड़े स्तर पर पाला जाता है. आम तौर पर भैंसें रोजाना करीब 12 से 15 तक लीटर दूध देती है, जबकि एक अच्छी मुर्रा भैंस इससे ज्यादा दूध दे सकती है. मुर्रा भैंस एख दिन में लगभग 20 लीटर तक दूध दे सकती है. हालांकि, दूध का उत्पादन पशु की नस्ल, उम्र, खान-पान और देखभाल पर निर्भर करता है.

दूध में फैट भी ज्यादा

मुर्रा भैंस के दूध की एक खासियत इसमें मौजूद फैट है. इसमें करीब 7 फीसदी तक फैट पाया जाता है. ज्यादा फैट वाला दूध घी, पनीर, दही और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट बनाने के लिए बेहतरीन माना जाता है. इस वजह से किसान चाहें तो केवल कच्चा दूध बेचने के बजाय आगे चलकर दूध से दूसरे उत्पाद तैयार करके भी कमाई का विकल्प तलाश सकते हैं.

2 भैंसों से शुरू कर सकते हैं डेयरी

अगर कोई किसान छोटे स्तर पर शुरुआत करना चाहता है, तो वह 2 मुर्रा भैंसों से डेयरी शुरू कर सकता है.

  • दोनों भैंसों से मिलाकर करीब 35 लीटर दूध रोजाना मिल सकता है.
  • अगर दूध को 50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जाए, तो रोजाना करीब 1700-1800 रुपये की बिक्री हो सकती है.
  • इसमें अगर 600-800 रुपये चारा, दवा और दूसरे खर्चों को घटा दें तो 1 हजार रुपये की बचत हो सकती है.

हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है और वास्तविक आमदनी दूध के दाम, पशुओं की उत्पादकता और रोजाना होने वाले खर्च पर निर्भर करेगी.

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अच्छी कमाई के लिए देखभाल जरूरी

डेयरी में सिर्फ अच्छी नस्ल का पशु खरीदना ही काफी नहीं है. पशुओं को संतुलित चारा, साफ पानी, समय पर टीकाकरण और साफ-सुथरा रहने का स्थान देना भी जरूरी है. पशु खरीदते समय उसकी उम्र, स्वास्थ्य, दूध देने की क्षमता और पहले के रिकॉर्ड की जांच जरूर करनी चाहिए.

इस तरह कम पशुओं से शुरुआत करके धीरे-धीरे डेयरी का आकार बढ़ाया जा सकता है. सही पशु, बेहतर देखभाल और दूध की अच्छी बिक्री व्यवस्था छोटे किसानों के लिए डेयरी को कमाई का अच्छा जरिया बनाने में मदद कर सकती है.

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