देश के किसानों के लिए आगामी 3 महीने यानी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का समय बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है. खरीफ फसलों की कटाई और रबी सीजन की शुरुआत के बीच मौसम वैज्ञानिकों और कृषि मंत्रालय ने खेती को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मौसम विभागों की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल-नीनो मौसमी ढांचा तेजी से मजबूत हो रहा है, जिसका सीधा असर सर्दियों के मौसम और देश की रबी फसलों पर पड़ने की पूरी आशंका है. आइए जानते हैं कि खेती के लिहाज से अगले 3 महीने कैसे रहने वाले हैं और देश के किसानों को किन-किन चीजों की विशेष तैयारी रखनी होगी.
अल-नीनो का बढ़ता खतरा
कृषि सचिव और मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जारी ताजा चेतावनियों के अनुसार, अल-नीनो के इस साल के अंत और 2027 की शुरुआत तक बेहद मजबूत होने की संभावना है. इसका सीधा मतलब यह है कि आगामी सर्दियों के महीनों में देश के कई हिस्सों, विशेषकर वर्षा आधारित और असिंचित कृषि क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम बारिश देखने को मिल सकती है.
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने पहले ही अपने कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति की घोषणा कर दी है. ऐसी स्थिति में मिट्टी की नमी कम होना स्वाभाविक है, जिससे रबी फसलों के अंकुरण और उनकी बढ़वार पर सीधा नकारात्मक असर पड़ सकता है.
पानी सोखने वाली फसलों से बनाएं दूरी
घटते जलस्तर और कमजोर मानसून के बाद जलाशयों की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए वाटर-बेस्ड क्रॉप प्लानिंग यानी पानी की उपलब्धता के आधार पर फसलों के चयन की सलाह दी है. किसानों को इस रबी सीजन में धान या गन्ने जैसी अत्यधिक पानी की खपत करने वाली फसलों को लगाने से बचना चाहिए. इसकी जगह वैज्ञानिकों ने किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली दलहन और तिलहन उगाने की अपील की है.
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पर्याप्त खाद का स्टॉक रखना है बेहद जरूरी
अक्टूबर और नवंबर का महीना रबी फसलों की बुवाई के लिए सबसे अहम माना जाता है, और इसी समय देश में खाद की मांग चरम पर होती है. इस बार बुवाई के पीक सीजन में किसी भी तरह की किल्लत या कतारों से बचने के लिए सरकार ने पहले से ही राज्यों के पास 38 मिलियन टन खाद का विशाल स्टॉक सुरक्षित कर दिया है, जिसमें डीएपी, यूरिया और एनपीके शामिल हैं.
सिंचाई के आधुनिक तरीकों को अपनाएं
अगले 3 महीनों में पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल करना ही खेती में मुनाफे की असली कुंजी होगी. पारंपरिक तरीके से खेतों को पानी से भरने के बजाय किसानों को अब ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाना होगा. इन तकनीकों के इस्तेमाल से न केवल 40 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, बल्कि उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचते हैं जिससे फसल की गुणवत्ता सुधरती है. सरकार इन सिंचाई यंत्रों पर भारी सब्सिडी भी दे रही है.
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