सब्जी की खेती में अगर सही वक्त पर सही किस्म का चुनाव कर लिया जाए तो कम जमीन में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. आजकल परंपरागत फसलों के मुकाबले नकदी सब्जियों की तरफ किसानों का रुझान बहुत तेजी से बढ़ रहा है. बैंगन एक ऐसी ही 12 महीने चलने वाली सदाबहार फसल है जिसकी भारी डिमांड हर छोटी-बड़ी सब्जी मंडी में हमेशा बनी रहती है. लेकिन अक्सर किसान और साधारण बीजों के चक्कर में पड़ जाते हैं. जिससे पैदावार घट जाती है.
सही हाइब्रिड और उन्नत किस्मों की मदद से आज कई इलाकों के किसान अपनी आमदनी को नई रफ्तार दे रहे हैं. सिर्फ 5 से 10 कट्ठा जैसे सीमित रकबे में आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान 40 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत बहुत कम समय में कर रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं इस उन्नत वैरायटी के बारे में और खेती के सही तरीकों के साथ होने वाली कमाई का पूरा हिसाब.
खेत की सही तैयारी का तरीका
बैंगन से रिकॉर्ड तोड़ पैदावार और मुनाफा निकालने के लिए सबसे काम सही वैरायटी का चुनाव करना होता है. बाजार में वीएनआर 212 हाइब्रिड बीजों की मांग सबसे ज्यादा रहती है क्योंकि ग्राहक इन्हें हाथों-हाथ खरीदते हैं. इन उन्नत किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि इनमें बीमारियों और मौसमी बदलाव को झेलने की बढ़िया की क्षमता होती है.
खेत तैयार करने के लिए जमीन की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बना लें. आखिरी जुताई के वक्त सड़ी हुई गोबर की खाद और नीम की खली जरूर मिलाएं ताकि जमीन में दीमक न लगे. इसके बाद खेत में उठी हुई मेड़ें यानी रेज्ड बेड बनाएं. पौधे से पौधे की दूरी 2 फीट और लाइन से लाइन की दूरी 3 फीट रखें जिससे पौधों को फैलने के लिए ठीख से हवा और धूप मिल सके.

देखभाल के इन तरीकों को जरूर अपनाएं
पौधों के सही से जमने जमाव के लिए हमेशा प्रो-ट्रे में कोकोपीट के साथ नर्सरी तैयार करें और बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करके ही बोएं. जब पौधे करीब 25 से 30 दिन के हो जाएं तभी खेत में शाम के वक्त उनकी रोपाई करें. आज के मॉडर्न दौर में मल्चिंग पेपर और ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल बैंगन की खेती काफी होता है.
प्लास्टिक मल्चिंग बिछाने से खेत में खरपतवार का नामोनिशान नहीं रहता और मिट्टी की नमी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है. ड्रिप सिस्टम से सीधे जड़ों तक बूंद-बूंद पानी और घुलनशील खाद पहुंचती है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं. कीटों से बचाव के लिए खेत में फेरोमोन ट्रैप और यलो स्टिकी ट्रैप लगाएं. शुरुआती दिनों में हल्के नीम के तेल का नियमित स्प्रे करने से रस चूसक कीटों और सुंडी का खतरा पूरी तरह टल जाता है.
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ऐसे होगी 40 हजार रुपये की कमाई
उन्नत किस्म की रोपाई के लगभग 50 से 60 दिनों के भीतर पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. यह फसल लगातार 4 से 6 महीने तक फल देती रहती है. जिससे किसान को हर हफ्ते नियमित और बंपर आमदनी मिलती है. एक-एक पौधे से गुच्छों में भारी और वजनदार फल निकलते हैं. अगर आप महज 5 से 10 कट्ठा जमीन में भी इस उन्नत किस्म को लगाते हैं.

तो पूरे सीजन में 20 से 30 क्विंटल तक बैंगन की बंपर पैदावार आसानी से मिल जाती है. मंडियों में ताजा और चमकदार बैंगन 20 से 30 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में बहुत आराम से बिक जाता है. बीज, खाद, सिंचाई, दवा और तुड़ाई का सारा खर्चा काटकर भी एक किसान इस छोटे से रकबे से 35 से 40 हजार रुपये का सीधा शुद्ध मुनाफा अपनी जेब में डाल सकता है.
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