Agriculture

किसानों के लिए जरूरी है सॉइल हेल्थ कार्ड, जानें कैसे बनवाएं?

N
ABP News
August 31, 20264 min read
किसानों के लिए जरूरी है सॉइल हेल्थ कार्ड, जानें कैसे बनवाएं?

खेती में अक्सर किसान एक ही शिकायत करते हैं कि हर साल खाद और दवाओं का खर्च बढ़ता जा रहा है. लेकिन उस हिसाब से पैदावार नहीं मिल रही. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हम बिना अपनी जमीन की जरूरत जाने अंदाजे से अंधाधुंध यूरिया और डीएपी खेत में डालते चले जाते हैं. जैसे इंसान की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर सबसे पहले ब्लड टेस्ट की सलाह देता है. ठीक वैसे ही खेत की मिट्टी का हेल्थ चेकअप भी बेहद जरूरी है.

केंद्र सरकार की सॉइल हेल्थ कार्ड योजना जमीन के लिए यही काम करती है. यह कार्ड आपकी जमीन की पूरी जन्मकुंडली है. जो साफ बताती है कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किसकी कमी है. अगर आप सही मात्रा में खाद डालकर खेती का खर्च आधा और मुनाफा दोगुना करना चाहते हैं. तो यह कार्ड आपके पास होना ही चाहिए. चलिए आपको बताते हैं इसके फायदे और इसे बनवाने का पूरा प्रॉसेस.

सॉइल हेल्थ कार्ड क्या है?

सॉइल हेल्थ कार्ड सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक रिपोर्ट कार्ड है. जो हर 3 साल में मिट्टी की स्थिति का अपडेट देता है. इस कार्ड के लिए मिट्टी के नमूने की लैब में 12 मुख्य पैरामीटर्स पर गहरी जांच की जाती है. इसमें प्राइमरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश, सेकेंडरी पोषक तत्व जैसे सल्फर, और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज और बोरॉन शामिल हैं.

इसके अलावा मिट्टी का पीएच मान, विद्युत चालकता और ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा भी जांची जाती है. यह कार्ड न सिर्फ कमियों को उजागर करता है. बल्कि यह सलाह भी देता है कि आने वाली फसल के लिए किस खाद की कितनी बोरी डालनी चाहिए. इससे जमीन बंजर होने से बचती है और अंधाधुंध रासायनिक खादों की बर्बादी पर तुरंत रोक लग जाती है.


मिट्टी का सैंपल लेने का सही तरीका

मिट्टी की सटीक रिपोर्ट पाने के लिए खेत से सही तरीके से सैंपल लेना सबसे जरूरी काम है. सैंपल हमेशा फसल कटाई के बाद या नई बुवाई से 15-20 दिन पहले लें. खेत के किनारों, पेड़ों की छांव, खाद के ढेर या पानी की नाली के पास से कभी भी मिट्टी न उठाएं. खेत के 8 से 10 अलग-अलग कोनों से अंग्रेजी के V आकार में 6 से 9 इंच गहरा गड्ढा खोदें.

उस गड्ढे की ऊपरी और निचली सतह से खुरपी की मदद से मिट्टी निकालें. इन सभी जगहों की मिट्टी को एक साफ प्लास्टिक की बोरी या बर्तन पर इकट्ठा करके अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद मिट्टी को चार हिस्सों में बांटें और आधा किलो मिट्टी छांट लें. इस मिट्टी को छांव में सुखाकर एक साफ थैली में भरें और उस पर अपना नाम, मोबाइल नंबर, खसरा नंबर और गांव का नाम लिखकर पर्ची लगा दें.

यह भी पढ़ें: ऐसे तैयार करें सब्जियों की नर्सरी, खेत में लगाने से पहले ये करें ये काम

किस तरह बनवाएं सॉइल हेल्थ कार्ड?

सॉइल हेल्थ कार्ड बनवाने के लिए किसान भाई अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, जिला कृषि कार्यालय या ब्लॉक स्तर के कृषि सहायक से संपर्क कर सकते हैं. विभाग के कर्मचारी खुद भी समय-समय पर गांवों में आकर सैंपल कलेक्ट करते हैं. अगर आप खुद जांच करवाना चाहते हैं. तो तैयार मिट्टी का सैंपल नजदीकी सरकारी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जमा कर दें. इसके लिए आधार कार्ड और जमीन के कागजात की जानकारी देनी होती है.


जांच पूरी होने के कुछ दिनों बाद किसान के मोबाइल पर एसएमएस आ जाता है. किसान सॉइल हेल्थ कार्ड के आधिकारिक पोर्टल soilhealth.dac.gov.in पर जाकर Farmer Corner में अपना राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव चुनकर डिजिटल कार्ड आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं. यह पूरी प्रोसेस किसानों के लिए बिल्कुल मुफ्त है और आपकी खेती को फायदे का सौदा बनाती है.

यह भी पढ़ें: ड्रिप इरिगेशन पर सरकार कितनी सब्सिडी देती है, जानें हिसाब-किताब?

Topics & Tags:#Agriculture
किसानों के लिए जरूरी है सॉइल हेल्थ कार्ड, जानें कैसे बनवाएं? | Kisan Reporter