अगर आप सब्जी की खेती करते हैं और इससे अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो सबसे पहले अपनी नर्सरी का ख्याल रखना आना चाहिए. अक्सर किसान बाजार से महंगे हाइब्रिड बीज तो ले आते हैं. लेकिन नर्सरी तैयार करते वक्त कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं. जिस वजह से उनके आधे पौधे उगते ही नहीं कई तो खेत में लगाने से पहले ही गलकर खत्म हो जाते हैं. अच्छी पैदावार के लिए एक मजबूत नर्सरी होना जरूरी है.
टमाटर, मिर्च, बैंगन, गोभी या शिमला मिर्च जैसी सब्जियों के लिए अगर पौध बढ़िया होगी. तो फसल भी कीड़ों और बीमारियों से डटकर लड़ेगी. आज के इस डिजिटल दौर में पुराने ढर्रे को छोड़कर अगर आप वैज्ञानिक तरीके से नर्सरी तैयार करेंगे तो बीजों का सौ फीसदी अंकुरण भी मिलेगा और समय की बचत भी होगी. चलिए आपको बताते हैं नर्सरी तैयार करने से लेकर रोपाई तक का पूरा प्रोसेस.
ऐसे तैयार करें बढ़िया नर्सरी
नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे पहले ऐसी जगह चुनें जहां दिनभर अच्छी धूप आती हो और पानी निकलने का बढ़िया इंतजाम हो. जमीन को अच्छी तरह भुरभुरा बनाकर करीब 15 सेंटीमीटर ऊंची उठी हुई क्यारियां तैयार करें. मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट जरूर मिलाएं जिससे पौधों को शुरुआत से ही भरपूर पोषण मिले. इसके बाद सबसे जरूरी काम आता है बीज उपचार का जिसे अक्सर किसान नजरअंदाज कर देते हैं.
बीजों को बोने से पहले किसी अच्छे फफूंदनाशक जैसे ट्राइकोडर्मा या कार्बेंडाजिम से जरूर उपचारित करें. इससे पौधों को शुरुआती गलन और डंपिंग-ऑफ जैसी जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा मिलती है. अगर आप खुले खेत के बजाय प्लास्टिक की प्रो-ट्रे में कोकोपीट, वर्मीकुलाइट और परलाइट का मिश्रण भरकर नर्सरी तैयार करते हैं. तो हर एक बीज से मजबूत पौधा बाहर निकलेगा और बीजों का नुकसान बिल्कुल शून्य हो जाएगा.

अंकुरण के बाद ऐसे देखभाल करें
बीज बोने के तुरंत बाद क्यारी को पुआल या सूखी घास से ढक दें और हजारे की मदद से हल्का पानी छिड़कें. जैसे ही बीजों से छोटे पौधे निकलने लगें तुरंत पुआल को हटा लें जिससे पौधों को ताजी हवा और हल्की धूप मिल सके. नर्सरी में कभी भी पाइप से तेज धार में पानी न दें, इससे पौधे टूट सकते हैं. नमी हमेशा हल्की बनाए रखें, ज्यादा पानी भरने से फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है.
पौधों को कीटों और तेज धूप से बचाने के लिए 50 प्रतिशत शेड नेट या 40 मेश के इंसेक्ट नेट का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद रहता है. जब पौधे दो पत्ती में आ जाएं, तो उन पर हल्का 19:19:19 घुलनशील खाद का स्प्रे करें जिससे तना मजबूत बने. अगर कहीं भी फफूंद या रस चूसक कीटों का हल्का सा भी असर दिखे तो तुरंत नीम के तेल का छिड़काव करें.

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खेत में रोपाई से पहले हार्डनिंग का ध्यान रखें
खेत में पौधे लगाने से कम से कम 4 से 5 दिन पहले एक बहुत जरूरी काम करना होता है, जिसे हार्डनिंग ऑ यानी पौधों को मजबूत बनाना कहते हैं. इसके तहत नर्सरी में पानी देना थोड़ा कम कर दिया जाता है और शेड नेट हटाकर पौधों को खुली धूप में रखा जाता है. इससे पौधे खेत की कड़ी धूप और खुले मौसम को झेलने के लिए तैयार हो जाते हैं और रोपाई के बाद मुरझाते नहीं हैं.
रोपाई के लिए लगभग 25 से 30 दिन की स्वस्थ पौध सबसे सही मानी जाती है. खेत में लगाने से 2 घंटे पहले क्यारियों में भरपूर पानी दें जिससे उखाड़ते समय जड़ें बिल्कुल न टूटें. रोपाई हमेशा दोपहर ढलने के बाद शाम के वक्त ही करें. पौधे लगाने से ठीक पहले उनकी जड़ों को फफूंदनाशक और इमिडाक्लोप्रिड के हल्के घोल में डुबोकर लगाएं जिससे दीमक और जड़ गलन की समस्या जड़ से खत्म हो जाए.
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