Moong drying method: मूंग की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई देने वाली फसल मानी जाती है. लेकिन कटाई के बाद अगर मूंग को सही तरीके से नहीं सुखाया जाता, तो दाने खराब होने लगते हैं और भंडारण में भी दिक्कत आती है. सही सुखाने की प्रक्रिया अपनाने से मूंग की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में अच्छा दाम मिलता है.
खेत से निकलते ही क्यों जरूरी है मूंग सुखाना
मूंग की फसल जब खेत से निकाली जाती है, तो उसमें नमी की मात्रा काफी अधिक होती है. अगर इसी अवस्था में मूंग को बोरियों में भरकर रख दिया जाता है, तो दानों में फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है. नमी के कारण दानों का रंग बदल जाता है और उनकी चमक कम हो जाती है, जिससे बाजार में सही दाम मिलना मुश्किल हो जाता है. इसलिए कटाई के तुरंत बाद मूंग को खुली और साफ जगह पर फैलाकर सुखाया जाता है.
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मूंग को सुखाने के लिए सबसे पहले उसे साफ तिरपाल या पक्के फर्श पर पतली परत में फैलाया जाता है, ताकि हर दाने तक धूप और हवा आसानी से पहुंचे. दिन में दो से तीन बार मूंग को पलटा जाता है, जिससे नमी समान रूप से कम होती है. मूंग को तब तक सुखाया जाता है जब तक उसमें नमी की मात्रा लगभग 9 से 10 प्रतिशत तक न रह जाए. रात के समय मूंग को ढककर रखा जाता है, ताकि ओस से दोबारा नमी न बढ़े.
भंडारण से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मूंग को पूरी तरह सुखाने के बाद ही बोरियों या भंडारण के लिए तैयार किए गए स्थान में रखा जाता है. भंडारण से पहले गोदाम या कोठी को अच्छी तरह साफ किया जाता है, ताकि पुराने कीड़े-मकोड़े न रहें. सूखी मूंग को हवादार और नमी रहित जगह पर रखा जाता है, जिससे दानों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है. सही तरीके से सुखाई और भंडारित की गई मूंग किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाने में मदद करती है.
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