अगर आप भी गेहूं, धान और गन्ने की खेती से तंग आ चुके हैं और खेत से तगड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो यह खबर आपके लिए ही है. आजकल देश के किसान परंपरागत फसलों को छोड़कर बागवानी की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. इसमें भी सबसे ऊपर नाम आ रहा है पपीते की खेती का जो कम समय में मुनाफा देने के लिए जानी जाती है.
पूर्वांचल से लेकर बिहार और देश के दूसरे हिस्सों तक के किसान अब एकड़ के हिसाब से पपीता उगाकर बंपर कमाई कर रहे हैं. अगर सही तरीके से और उन्नत वैरायटी का चुनाव करके खेती की जाए. तो एक एकड़ जमीन से महज कुछ ही महीनों में 7 लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि पपीते की इस खेती को कैसे शुरू किया जा सकता है.
सही वैरायटी का चुनाव और खेत तैयार करने का तरीका
कोई भी फसल कितना मुनाफा देगी यह इस बात पर डिपेंड करता है कि आपके उसकी शुरूआत कैसे की है. पपीते की खेती के लिए सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच और उसकी बेहतरीन जुताई बहुत जरूरी है. पपीते के पौधों को जलभराव बिल्कुल पसंद नहीं है. इसलिए खेत ऐसा होना चाहिए जहां पानी रुकता न हो और पानी निकलने का पक्का इंतजाम हो. मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7 के बीच हो और दोमट या बलुई दोमट मिट्टी मिल जाए. तो और ही बढ़िया है.
बाजार में आजकल कई उन्नत किस्में मौजूद हैं. जिनमें रेड लेडी 786 जैसी वैरायटी किसानों के बीच सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है. इस वैरायटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पौधे बहुत कम समय में फल देना शुरू कर देते हैं और एक ही पौधे पर बंपर मात्रा में फल लगते हैं. बीज बोकर पहले नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं और जब पौधे करीब एक से डेढ़ महीने के हो जाएं. तो उन्हें खेत में बनाई गई क्यारियों में निश्चित दूरी पर रोप दिया जाता है जिससे हर पौधे को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके.

इस तरह करें पौधों की देखभाल
खेती करते वक्त आपको फसल की सही देखभाल भी करनी होती है, एक एकड़ में पपीते की खेती शुरू करने में लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक की शुरुआती लागत आती है. जिसमें अच्छे किस्म के बीज या पौधे, जैविक खाद और हल्की जुताई का खर्चा शामिल होता है. यूरिया या डीएपी के अंधाधुंध इस्तेमाल की बजाय अगर गोबर की सड़ी हुई खाद का इस्तेमाल किया जाए. तो मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है और पौधे अंदर से मजबूत होते हैं.
सिंचाई के मामले में गर्मियों के दिनों में नियमित अंतराल पर ड्रिप सिंचाई या हल्की सिंचाई की जरूरत होती है, जबकि सर्दियों में पाले से पौधों को बचाने का खास इंतजाम करना पड़ता है. ठंड के दिनों में किसान अक्सर खेतों के किनारे धुआं सुलगा देते हैं जिससे पौधों को गर्माहत मिलती रहे और वे पाले की मार से सुरक्षित रहें. इसके अलावा शुरुआती दौर में निराई-गुड़ाई करके खेत को खरपतवार से बचाकर रखना पड़ता है जिससे कोई कीट और बीमारी पौधे को खराब न कर सके.
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7 लाख तक की कमाई
अब सबसे जरूरी बात पर आते हैं कि इससे 7 लाख रुपये तक का मुनाफा कैसे हो सकता है. तो आपको बता दें पपीते का एक स्वस्थ पौधा लगभग 40 से 50 किलो तक फल दे देता है. जब आप इसे हाई डेंसिटी और सही पौधे की संख्या के हिसाब से एक एकड़ में लगाते हैं. तो कुल पैदावार हजारों किलो में पहुंच जाती है. लोकल मंडी से लेकर बड़े व्यापारियों तक, पपीते की डिमांड हमेशा आसमान पर रहती है.
क्योंकि इसका इस्तेमाल खाने के अलावा दवाइयों और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में भी होता है.पपीता एक ऐसी फसल है जो रोपाई के कुछ ही महीनों बाद फल देना शुरू कर देती है, इसलिए किसानों को लगातार आमदनी मिलती रहती है. अगर आप भी कम जमीन और कम लागत में सालभर तगड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो पपीते की यह आधुनिक खेती आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती है.

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