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ICAR-IARI ने डिवेलप की Pusa Wheat 3471, किसानों के लिए क्यों है खास?

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ABP News
October 7, 2026•3 min read
ICAR-IARI ने डिवेलप की Pusa Wheat 3471, किसानों के लिए क्यों है खास?

Pusa Wheat 3471: रबी सीजन में गेहूं की बुवाई का समय नजदीक आ रहा है. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि कौन-सी किस्म बोई जाए, जिससे फसल अच्छी हो और मौसम या बीमारी की वजह से नुकसान कम हो. इसी बीच Pusa Wheat 3471 यानी HD 3471 गेहूं की एक ऐसी किस्म के तौर पर चर्चा में है, जिस पर किसानों की नजर है.

इस किस्म को ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI), पूसा ने गेहूं की मशहूर किस्म HD 3086 को बेहतर बनाकर तैयार किया है. इसे तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि गेहूं की फसल में बीमारी का असर कम हो और पानी की कमी जैसी स्थिति में भी फसल को संभालने की क्षमता रहे. यह किस्म बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों के बीच किसानों के लिए काम की साबित हो सकती है.

HD 3086 को बेहतर बनाकर तैयार हुई किस्म

HD 3471 को समझने के लिए पहले HD 3086 यानी पूसा गौतमी को जानना जरूरी है. इसे उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में समय पर बोई जाने वाली सिंचित गेहूं की फसल के लिए तैयार किया गया था. IARI के मुताबिक, इसकी औसत पैदावार करीब 54.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि अच्छी परिस्थितियों में यह करीब 71 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. वैज्ञानिकों ने इसी किस्म को आधार बनाकर HD 3471 तैयार की. इसका मकसद अच्छी पैदावार के साथ बीमारी और पानी की कमी जैसी दिक्कतों का बेहतर सामना करने वाली गेहूं की किस्म तैयार करना था.

MABB तकनीक से जोड़े गए खास गुण

HD 3471 को MABB तकनीक की मदद से तैयार किया गया है. आसान भाषा में समझें तो वैज्ञानिकों ने HD 3086 में दूसरी गेहूं की किस्म HI 1500 के कुछ खास गुण जोड़े. इसमें पत्ती के रतुआ रोग से बचाव के लिए Lr24 जीन और पानी की कमी से जुड़ी कुछ खूबियां शामिल की गईं. खेत और नियंत्रित माहौल में करीब दो साल तक इसकी जांच की गई. इसमें रतुआ रोग के खिलाफ बेहतर पकड़ और कम पानी की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला. इसके बाद इसे आगे के राष्ट्रीय परीक्षणों के लिए चुना गया.

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किन किसानों के लिए है खास?

HD 3471 का परीक्षण मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में समय पर बोई जाने वाली और सिंचाई वाली गेहूं की फसल के लिए किया गया है. इसमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और आसपास के इलाके शामिल हैं. हालांकि, किसी भी इलाके में इसकी बुवाई करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहेगा.

किसान इस बात का रखें ध्यान

HD 3471 को कई जगह नई गेहूं की किस्म बताया जा रहा है. लेकिन वैज्ञानिक रिकॉर्ड में इसे राष्ट्रीय परीक्षणों के लिए शामिल की गई लाइन के तौर पर दर्ज किया गया है. इसलिए किसान सिर्फ सोशल मीडिया या बाजार की बातों पर भरोसा करके इसका बीज न खरीदें. बीज लेने से पहले इसकी उपलब्धता, सरकारी सिफारिश और असली होने की जांच जरूर कर लें.

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