Human Waste Fertilizer: जिस चीज को हम आमतौर पर बेकार और गंदा समझकर तुरंत दूर करना चाहते हैं, वही खेती के लिए काम की चीज बन सकती है. बात हो रही है इंसानी मल और पेशाब की. वैज्ञानिकों के मुताबिक मानव मल-मूत्र में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों की बढ़वार के लिए जरूरी हैं. अब दुनिया भर में इसे सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करके खाद और मिट्टी सुधारने वाले उत्पाद के रूप में इस्तेमाल करने पर काम हो रहा है.
इंसान के शरीर से निकलने वाला मल-मूत्र सुनने में भले ही गंदा लगे, लेकिन खेत के लिए इसमें काम की चीजें छिपी होती हैं. खासकर पेशाब में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व अच्छी मात्रा में मिलते हैं, जिनकी जरूरत फसलों को बढ़ने के लिए होती है. रिसर्च के मुताबिक, सीवेज में पहुंचने वाले नाइट्रोजन और फास्फोरस का बड़ा हिस्सा पेशाब के जरिए ही आता है. इससे किसान को नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों का एक वैकल्पिक सोर्स मिल सकता है और खाद पर होने वाला खर्च कुछ हद तक कम हो सकता है. यानी जिस पोषण के लिए किसान बाहर से खाद खरीदता है, उसका कुछ हिस्सा हमारे घरों से निकलने वाले इस कचरे में ही मौजूद है.
सीधे खेत में डालना खतरनाक हो सकता है
लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है. इंसानी मल-मूत्र को उठाकर सीधे खेत में नहीं डाला जा सकता है. ऐसा करना फसल और इंसान दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. कच्चे मल में कई तरह के कीटाणु और परजीवी हो सकते हैं. इसके अलावा दवाओं के बचे हुए अंश और कुछ दूसरी नुकसानदायक चीजें भी इसमें मौजूद हो सकती हैं.
ऐसे करें इस्तेमाल
इंसानी मल-मूत्र को सीधे खेत में डालने के बजाय पहले इसे सही तरीके से ट्रीट करके खाद या दूसरे सुरक्षित उत्पाद में बदला जाता है. इसके बाद ही इसे खेत में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. कितनी मात्रा में और किस फसल में इसका इस्तेमाल करना है, यह खाद की क्वालिटी और ट्रीटमेंट के तरीके के हिसाब से तय किया जाता है. बिना ट्रीटमेंट वाला मानव मल खेत में डालने से बचें.
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किसान के लिए क्या है फायदा?
अगर इंसानी मल-मूत्र को सही तरीके से खाद में बदला जाए, तो इससे खेत को जैविक खाद और जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं. इससे कचरे का भी सही इस्तेमाल हो जाएगा और किसान को बाहर से कुछ खाद कम खरीदनी पड़ सकती है.
लेकिन ध्यान रखें, कच्चा इंसानी मल सीधे खेत में डालना ठीक नहीं है. पहले इसे अच्छी तरह ट्रीट करके सुरक्षित बनाना जरूरी है. तभी तैयार खाद का खेत में इस्तेमाल करना चाहिए. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानव मल-मूत्र को खेती में इस्तेमाल करने से पहले कीटाणु और बीमारी के खतरे को खत्म करने पर जोर देता है.
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