फसल की कटाई के बाद खेत में डंठल, पत्तियां और दूसरे अवशेष बच जाते हैं. कई किसान इन्हें बेकार समझकर जला देते हैं या खेत से बाहर फेंक देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हीं अवशेषों से अच्छी जैविक खाद बनाई जा सकती है? इससे खेत की मिट्टी को पोषण मिलता है और रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च भी कम करने में मदद मिलती है. आइए जानते हैं कि फसल के अवशेषों से खाद कैसे तैयार करते हैं.
फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं
खेत में खाद बनाने का सबसे आसान तरीका फसल के बचे हुए अवशेषों को मिट्टी में मिलाना है. इसके लिए कटाई के बाद डंठल और पत्तियों को रोटावेटर या कल्टीवेटर की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसके बाद इन्हें मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें. मिट्टी में नमी बनाए रखें, ताकि अवशेष धीरे-धीरे गलकर खाद में बदल सकें.
डीकंपोजर की मदद से बनाएं खाद
अगर आप फसल के अवशेषों को जल्दी गलाकर खाद बनाना चाहते हैं, तो बायोडीकंपोजर का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह एक ऐसा घोल होता है, जो अवशेषों को गलाने में मदद करता है. इसे कृषि केंद्र से लेकर दिए गए निर्देशों के अनुसार तैयार करें और फसल के अवशेषों पर छिड़क दें. इसके बाद खेत में नमी बनाए रखें. कुछ समय में अवशेष गलने लगेंगे और खाद तैयार होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. खाद बनने में कितना समय लगेगा, यह मौसम और अवशेषों की स्थिति पर निर्भर करता है.
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गोबर और केंचुओं से तैयार करें जैविक खाद
फसल के अवशेषों से खाद बनाने के लिए गोबर और केंचुओं की मदद भी ली जा सकती है. इसके लिए किसी छायादार जगह पर गड्ढा या खाद बनाने की जगह तैयार करें. इसमें फसल के अवशेषों और सड़े हुए गोबर की परतें लगाएं. जब सामग्री अच्छी तरह गलने लगे और गर्मी कम हो जाए, तब इसमें खाद बनाने वाले केंचुए डालें. समय-समय पर पानी छिड़कते रहें, ताकि नमी बनी रहे. कुछ समय बाद इससे जैविक खाद तैयार हो जाएगी, जिसका इस्तेमाल खेत की मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है.
फसल के अवशेषों से खाद बनाने के क्या हैं फायदे?
फसल के अवशेषों को फेंकने या जलाने के बजाय खाद बनाने से किसानों को कई फायदे मिलते हैं. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और उसकी पानी रोकने की क्षमता बेहतर होती है. साथ ही, खेत में मौजूद अवशेषों का इस्तेमाल खाद के रूप में होने से बाहर से खाद खरीदने का खर्च भी कुछ कम हो जाता है.
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