गन्ना आमतौर पर बड़े खेतों में उगाई जाने वाली फसल है, लेकिन अगर आपके घर में थोड़ी खुली जगह है तो इसे आप अपने घर के किचन गार्डन का हिस्सा भी बना सकते हैं. उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन के लिए देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है और यहां उगाई जाने वाली गन्ने की कई किस्में घरेलू स्तर पर भी प्रयोग की जा सकती हैं.
किचन गार्डन में गन्ना उगाने के लिए खेत की तरह ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती, बल्कि सही तकनीक और पौधों के बीच उचित दूरी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में आइए जानते हैं किचन गार्डन में गन्ना उगाने की टेक्निक के बार में.
गन्ना उगाने के लिए सही जगह
गन्ना उगाने के लिए सबसे पहले ऐसी जगह चुनें जहां दिन में कम से कम 6-8 घंटे सीधी धूप पहुंचती हो. गन्ने का पौधा लंबा होता है, इसलिए इसे दीवार, बालकनी के किनारे या किचन गार्डन के पीछे की तरफ लगाना सही होगा. अगर जमीन नहीं है तो किसी बड़े और गहरे ग्रो बैग या कंटेनर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. कंटेनर में गन्ना लगाने के लिए ऐसा गमला चुनें जिसकी गहराई अच्छी हो और जिसमें पौधे की जड़ों को फैलने की पर्याप्त जगह मिले.
गन्ने के टुकड़े आएंगे काम
गन्ने को आम पौधों की तरह बीज से उगाने के बजाय इसके सेट्स या तने के टुकड़ों से लगाया जाता है. इसके लिए स्वस्थ और रोगमुक्त गन्ने की ऐसी डंडी चुनें जिसमें 2-3 आंखें यानी कलियां मौजूद हों. गन्ने के टुकड़े को जमीन में इस तरह रखें कि कलियां सही दिशा में रहें और उनके ऊपर मिट्टी की हल्की परत हो. ध्यान दें बहुत गहराई में लगाने से अंकुर निकलने में परेशानी हो सकती है.
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ऐसे तैयार करें मिट्टी
किचन गार्डन में गन्ने के लिए मिट्टी का भुरभुरा और अच्छी जल निकासी वाला होना जरूरी है. भारी और पानी रोकने वाली मिट्टी में जड़ों को नुकसान पहुंचता है. आप बगीचे की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाकर उसे तैयार कर सकते हैं.
सिंचाई में रखें खास सावधानी
गन्ने को पानी की जरूरत होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गमले या क्यारी में हमेशा पानी जमा रहे. मिट्टी की ऊपरी परत सूखने लगे तो सिंचाई करें और अधिक पानी निकलने की व्यवस्था रखें. गमले में ज्यादा पानी होने से गन्ने के विकास में परेशानी होती है.
खाद देने का रखें ख्याल
गन्ने की अच्छी बढ़वार के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल करना गन्ने के विकास के लिए सही होता है. शुरुआत में मिट्टी में कंपोस्ट मिलाने के बाद पौधे की बढ़वार के दौरान जरूरत के अनुसार जैविक खाद देना बेहतर होता है. बहुत ज्यादा खाद डालने के बजाय मिट्टी और पौधे की स्थिति देखकर पोषण देना बेहतर है. अगर पौधे की पत्तियां पीली पड़ रही हैं या बढ़वार रुक गई है, तो ऐसे में बिमारी का पता लगाएं. गन्ने को तैयार होने में सामान्य सब्जियों की तुलना में काफी ज्यादा समय लगता है. इसकी अवधि गन्ने की किस्म, मौसम, मिट्टी और देखभाल पर निर्भर करती है. जब तने अच्छी तरह विकसित हो जाएं तब कटाई की जा सकती है.
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