हर साल धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. इसे जल्दी हटाने के लिए कई जगहों पर किसान खेत में ही पराली जला देते हैं. इससे धुआं और प्रदूषण बढ़ता है. साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है. हालांकि जिस पराली को अक्सर बेकार समझ लिया जाता है, वही सही तरीके से इस्तेमाल करने पर किसानों के लिए कमाई का एक जरिया बन सकती है. जरूरत सिर्फ इसे जलाने के बजाय दूसरे विकल्पों को अपनाने की है.
ऐसे में जानिए पराली का सही इस्तेमाल कैसे किया जाता है. जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है और किसानों के लिए एक आय का विकल्प भी मिल जाता है. जानें पराली से बनने वाले बायोफ्यूल और खाद के बारे में.
पराली से बन सकता है बायोफ्यू
धान और गेहूं की पराली में जैविक पदार्थ और ऊर्जा मौजूद होती है. इसे इकट्ठा करके बायोमास ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. कई जगहों पर पराली से बायोमास पेलेट्स और ब्रिकेट्स तैयार किए जाते हैं. इनका इस्तेमाल औद्योगिक बॉयलर और कुछ अन्य ईंधन आधारित इकाइयों में किया जा सकता है. किसान अगर स्थानीय स्तर पर चल रहे बायोमास कलेक्शन सेंटर या कंपनियों को पराली बेचते हैं, तो खेत साफ करने के साथ अधिक आमदनी भी हासिल कर सकते हैं.
खाद बनाकर खेत में ही करें इस्तेमाल
पराली को जलाने की जगह उससे जैविक खाद तैयार करना भी एक बेहतरीन विकल्प है. फसल अवशेष को छोटे टुकड़ों में काटकर उचित नमी और जैविक प्रक्रिया के जरिए कंपोस्ट में बदला जा सकता है. इससे खेत में जैविक पदार्थ वापस पहुंचता है और मिट्टी की संरचना बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है. इस तरीके की खास बात यह है कि किसान को पराली बाहर ले जाने की जरूरत भी कम पड़ती है और खेत में ही पोषक तत्व बने रहते हैं.
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मशरूम की खेती में भी उपयोग
पराली का इस्तेमाल कुछ तरह की मशरूम खेती के लिए तैयार किए जाने वाले सब्सट्रेट में किया जाता है. खासतौर पर धान की पराली को उपचारित करके मशरूम उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में फसल का अवशेष कचरा नहीं रहता, बल्कि दूसरी कृषि गतिविधि के लिए कच्चा माल बन जाता है. अगर आप मशरूम की खेती करते हैं, तो यह आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है.
पैकेजिंग और बोर्ड बनाने में भी इस्तेमाल
आज फसल अवशेष से पर्यावरण के हिसाब से कई प्रोडक्ट तैयार करने पर भी काम हो रहा है. पराली से पार्टिकल बोर्ड, पैकेजिंग सामग्री और दूसरे फाइबर आधारित प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं. इससे प्लास्टिक या लकड़ी पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. जहां ऐसी प्रोसेसिंग यूनिट उपलब्ध हैं, वहां किसान या किसान समूह पराली की बिक्री कर सकते हैं.
मशीनों से खेत में ही करें प्रबंधन
अगर आप पराली को बेचने के बजाय खेत में ही उसका प्रबंधन करना चाहते हैं तो हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर और मल्चर जैसी मशीनें आपके लिए मददगार हो सकती हैं. इनके जरिए फसल अवशेष को काटकर या खेत में मिलाकर अगली फसल की बुवाई की जा सकती है. इससे पराली जलाने की जरूरत कम होती है और खेत के जैविक पदार्थ का भी उपयोग होता है.
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