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मानसून में मुर्गी पालन से होगी अच्छी कमाई, इन गलतियों से बचें

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ABP News
August 16, 20264 min read
मानसून में मुर्गी पालन से होगी अच्छी कमाई, इन गलतियों से बचें

Poultry Farming Tips: मानसून आते ही पोल्ट्री फार्म में काम थोड़ा बढ़ जाता है. बारिश के मौसम में ह्यूमिडिटी और नमी से मुर्गियों की सेहत खराब हो सकती है. ऐसे में अगर शेड की सफाई से लेकर दाने और पानी तक पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. इसका असर मुर्गियों की ग्रोथ, अंडे के प्रोडक्शन पर पड़ता है जिससे कमाई भी प्रभावित होती है. लेकिन अगर आप पूरी तैयारी के साथ मानसून के सीजन में पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करते हैं तो यह फायदे का सौदा बन सकता है.

आपको बता दें इसके लिए अलग से बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है. बस शेड को लेकर कुछ बातें ध्यान में रखनी होंगी और कुछ चीजों का इंतजाम करना है. अगर आप सही बातों का ध्यान रखेंगे तो मानसून में भी मुर्गी पालन आपको खूब मुनाफा दिलाएगा. चलिए आपको बताते हैं इन जरूरी बातों के बारे में पूरी जानकारी.

शेड में पानी और नमी को बिल्कुल जमा न होने दें

मानसून में पोल्ट्री फार्म की सबसे पहला काम है कि शेड को सूखा रखा जाए. अगर शेड के अंदर बारिश का पानी आ रहा हो इससे फर्श पर नमी आ रही है है तो इसे तुरंत ठीक करें. मुर्गियों के नीचे बिछा बिछठाव लगातार गीला रहने से बदबू, फफूंद और इंफेक्शन की दिक्कत बढ़ सकती है. इसलिए गीले बिछावन को हटाकर सूखा बुरादा डाल दें फिर उसके ऊपर बिछावन बिछाएं ध्यान रहे कि शेड में हवा की आवाजाही बनी रहनी चाहिए.

जिससे उमस कम रहेगी. हालांकि शेड में वेंटिलेशन इस तरह से होना चाहिए कि बारिश की बूंदें अंदर न आए. मुर्गियों को जरूरत से ज्यादा संख्या में एक ही जगह रखने से भी बचें. ज्यादा भीड़ में गर्मी और नमी दोनों बढ़ सकती हैं. शेड के बाहर भी पानी जमा न होने दें. नालियों और पानी निकलने का रास्ता साफ रखें. साफ, सूखा और हवादार शेड मानसून में मुर्गियों को स्वस्थ रखने की सबसे जरूरी शर्तों में शामिल है.


दाने और पानी की क्वालिटी पर रखें नजर

बारिश में फीड को लेकर जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. नमी वाली जगह पर रखा दाना जल्दी खराब हो सकता है और उसमें फफूंद लगने का खतरा रहता है. इसलिए फीड को हमेशा सूखी, साफ और हवादार जगह पर रखें. एक साथ जरूरत से ज्यादा दाना खरीदकर रखने से भी बचें. फीडर में उतना ही दाना डालें जितना मुर्गियां आसानी से खा सकें. बचा हुआ गीला दाना दोबारा इस्तेमाल न करें.

पानी के मामले में भी रोजाना सफाई जरूरी है. बारिश के बाद आसपास जमा गंदा पानी पीने वाले पानी में न मिल पाए इसका ध्यान रखें. पानी के बर्तनों को रोज धोकर उनमें ताजा पानी भरना सही रहेगा. इस मौसम में मुर्गियों की डाइट भी चेंज करते रहें क्योंकि अच्छी ग्रोथ के लिए सही मात्रा में पोषण मिलना चाहिए. अगर उनकी फीड में फफूंद नजर आए तो उसे अलग कर दें. मानसून में साफ फीड और साफ पानी बहुत जरूरी होता है.

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बीमारी के संकेत दिखें तो तुरंत लें एक्शन

बारिश के मौसम में बीमारी को लेकर बचाव करना जरूरी है. अगर कोई मुर्गी अचानक सुस्त नजर आए, दाना कम खाए, पानी पीना कम कर दे, अलग बैठी रहे तो इसे नॉर्मल समझकर मत छोड़ें. ऐसी मुर्गी को बाकियों से अलग रखना बेहतर होता है. जिससे इंफेक्शन फैलने का खतरा कम हो. नई मुर्गियों को भी सीधे पुराने झुंड में रखने के बजाय पहले उनका हेल्थ चेकअप कराएं. वैक्सीनेशन टाइम पर करवाएं और कोई बीमारी नजर आए तो पशु चिकित्सक से सलाह लें है.

कभी भी खुद से दवा न दें इस बात का खास तौर पर ध्यान रखें. शेड के आसपास चूहे, कीड़े और गंदगी जमा न होने दें. अगर कोई मुर्गी मर गई है तो उसे ऐसे ही खुले में फेंकने के बजाय सेफ्टी अपना कर बाकायदा तरीके से हटाएं. अगर आप इन सभी बातों का ध्यान रखते हैं तो यकीनन मानसून में आपका मुर्गी पालन का काम काफी बढ़िया चल सकता है.


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