Warehouse Receipt Financing: फसल जब पक कर कट जाती है. तो किसानों के सामने एक जो दिक्कत होती है वह यह होती है कि अगर तुरंत फसल बेची तो भाव कम होने से मुनाफा कम होगा. अगर फसल को कुछ दिन रोका तो फिर आगे के खर्च का पैसा कहां से आएगा किसने की इसी परेशानी को दूर करते हुए सरकार अब उन्हें एक नई और सुविधा मुहैया करवा रही है. इसके तहत किसान गोदाम में रखी अपनी फसल पर लोन ले सकते हैं.
इसे वेयरहाउस रिसीट फाइनेंसिंग कहा जाता है. सरकार ने ई-किसान उपज निधि के जरिए इस प्रोसेस को डिजिटल तरीके से आसान बनाने की पहल की है. इसके तहत किसान मान्यता प्राप्त गोदाम में रखी उपज की इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रिसीट के आधार पर पोस्ट हार्वेस्ट लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं. यानी जरूरत के समय फसल बेचने की मजबूरी कम हो सकती है और किसान बाजार में बेहतर भाव आने का इंतजार कर सकता है. जानें कैसे मिलेगा इस पर लोन.
गोदाम में फसल रखकर कैसे मिलेगा लोन?
किसान गोदाम में अपनी रखी फसल पर लोन कैसे ले सकते हैं इसके लिए सबसे पहले उन्हें अपनी उपज WDRA से पंजीकृत वेयरहाउस में जमा करता है. फसल जमा होने के बाद उसके बदले इलेक्ट्रॉनिक Negotiable Warehouse Receipt यानी e-NWR जारी होती है. यही रिसीट बैंक से लोन लेने में काफी जरूरी होती है. ई-किसान उपज निधिकिसानों को बैंकों के लोन ऑफर से जोड़ने का काम करता है.
किसान प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऑप्शनंस को देखकर अपनी जरूरत के हिसाब से बैंक चुन सकता है. लोन की रकम फसल की कीमत, बैंक के नियम और किसान की पात्रता के आधार पर तय होती है. यानी रिसीट हाथ में आने के बाद भी बैंक अपनी जांच करता है. इस व्यवस्था में फसल गोदाम में सेफ रहती है और किसान उसे तुरंत बेचने के बजाय उसके आधार पर पैसों का इंतजाम कर सकता है.

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कम भाव में फसल बेचने से बचने का मौका
मान लीजिए किसान ने गेहूं, सरसों, चना या कोई दूसरी फसल तैयार की है और उस समय बाजार भाव कमजोर चल रहा है. घर में फसल रखने की जगह नहीं है लेकिन किसान को अगली फसल के लिए पैसों की जरूरत है. ऐसी सिचुएशन में किसानों मान्यता प्राप्त वेयरहाउस में उपज रखकर वेयरहाउस रिसीट के बदले लोन लेने का ऑप्शन काम आ सकता है. किसान कर्ज लेकर हालिया खर्च संभाल सकता है और बाजार में भाव बेहतर होने का इंतजार कर सकता है.
सरकार की इस व्यवस्था से किसानों को मजबूरी के चलते कम भाव पर अपनी फसल बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्यों इस स्कीम से उनके पैसों का इंतजाम हो जाएगा. हालांकि पहले किसानों को लोन पर ब्याज कितना लगेगा और वेयरहाउस में फसल रखने का खर्च कितना आएगा यह भी पता कर लेना चाहिए. इसलिए किसान को आगे क्या बाजार भाव होगा, लोन ब्याज में पैसा कितना जाएगा, फसल रखने में कितने पैसे लगेंगे यह सब बातें पहले कैलकुलेट करनी जरूरी हैं.
वेयरहाउस रिसीट फाइनेंसिंग के लिए आवेदन का तरीका
इस सुविधा का फायदा लेने के लिए सबसे पहले फसल का WDRA से रजिस्टर्ड वेयरहाउस में जमा होना जरूरी है. इसके बाद जारी हुई e-NWR के बेसिस पर किसान लोन प्रोसेस आगे बढ़ा सकता है. ई-किसान उपज निधि के जरिए बैंक के लोन ऑफर देखे जा सकते हैं. आवेदन के लिए जनसर्मथ पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है. किसान को उसी मोबाइल नंबर से आवेदन करना होता है. जो रिपॉजिटरी अकाउंट में दर्ज है. सिस्टम उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी की जांच करता है.
इसके बाद बैंक के लोन ऑप्शन सामने आते हैं. किसान अपनी जरूरत के हिसाब से ऑप्शन चुन सकता है. आगे बैंक दस्तावेज और पात्रता की जांच करता है. मंजूरी मिलने के बाद लोन की रकम जारी होती है. ध्यान रखें कि e-NWR होने से लोन मिलना तय नहीं होता. बैंक अपनी क्रेडिट पॉलिसी के हिसाब से फैसला करता है. इसलिए आवेदन से पहले इंटरेस्ट रेट, लोन लिमिट, मार्जिन, फीस और पेमेंट की शर्तें पता कर लें.

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