Turmeric Growing Tips: घर में बनने वाली दाल हो, सब्जी हो, या कुछ और चीज हल्दी के बिना खाने की किसी भी डिश का रंग और स्वाद अधूरा लगता है. हल्दी हर घर में इस्तेमाल की जाने वाली चीज में होता है. लेकिन आजकल बाजार से जो पैकेटबंद पिसी हल्दी हम खरीदते हैं उसमें मिलावट का डर हमेशा बना रहता है. कई बार उसका फीका रंग देखकर ही शक होने लगता है कि इसमें केमिकल मिले हैं. अगर आप भी इस मिलावट के डर से पूरी तरह बचना चाहते हैं.
तो सबसे बढ़िया तरीक है कि इसे खुद अपने घर पर ही उगा लें. घर की बालकनी में गमले के अंदर हल्दी उगाना बहुत ही आसान काम है. इसके लिए बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही इसके लिए आपको गार्डनिंग का एक्सपर्ट होना जरूरी है. बस एक सही साइज का गमला, सही तरीके से तैयार की गई मिट्टी और थोड़ी बहुत देखरेख और फिर आप घर में ही उगा लेंगे 100 परसेंट बिना मिलावट वाली हल्दी.
ऐसे करें हल्दी उगाने शुरूआत
हल्दी का पौधा लगाने के लिए आपको किसी नर्सरी के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आप लोकल सब्जी मंडी जाकर ताजी कच्ची हल्दी की मोटी गांठें खरीद सकते हैं. बस खरीदते समय ध्यान रखें कि गांठों पर छोटे-छोटे कल्ले बने हों. सूखी और सड़ी हुई गांठें मत चुनिएगा क्योंकि उनसे पौधा ठीक से नहीं पनपेगा. अब गमले की बात करें तो हल्दी की जड़ें जमीन के नीचे चौड़ाई में फैलती हैं. इसलिए हमेशा 12 से 14 इंच गहरा, अच्छा चौड़ा गमला इस्तेमाल करें.
गमले के बेस में ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए जिससे फालतू पानी आसानी से बह जाए. मिट्टी तैयार करते समय 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30% गोबर की सड़ी खाद, 20% रेत मिलाकर बेहतरीन मिक्स बनाएं. यह कॉम्बिनेशन मिट्टी को हल्का और भुरभुरा रखता है. इससे नीचे गांठों को फैलने के लिए पूरी जगह मिलती है और हल्दी का साइज काफी मोटा निकलकर आता है.

हल्दी बोने का सही समय
हल्दी लगाने के लिए वैसे तो अप्रैल से लेकर अगस्त का समय सबसे सही माना जाता है. अगर आप अभी अगस्त के महीने में इसे लगा रहे हैं तो यह बिल्कुल सही टाइम है क्योंकि मॉनसून की नमी और बारिश के चलते पौधे की ग्रोथ दोगुनी रफ्तार से होती है. गमले में मिट्टी भरकर गांठ को करीब दो से तीन इंच नीचे दबा दें. जो अंकुर वाला सिरा है उसे हमेशा ऊपर की ओर रखें जिससे तना सीधा बाहर निकले. लगाने के तुरंत बाद हल्का पानी छिड़कें जिससे नमी बैठ जाए.
गमले को ऐसी जगह पर रखें जहां दिन में चार से पांच घंटे की धूप आती रहे. तेज चिलचिलाती धूप से पत्तियों के झुलसने का खतरा रहता है. इसलिए सुबह की मीठी धूप इसके लिए सबसे अच्छी है. पानी देते वक्त खास ख्याल रखें कि मिट्टी में सिर्फ हल्की नमी रहनी चाहिए गमले में कीचड़ नहीं बनना चाहिए. जब भी ऊपरी मिट्टी छूने पर सूखी महसूस हो तभी पानी डालें. तकरीबन दो से तीन हफ्तों में गमले से सुंदर हरी पत्तियां बाहर निकलने लगेंगी.
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इन तरीकों से करें देखभाल
हल्दी की फसल तैयार होने में थोड़ा वक्त लगता है आमतौर पर इसमें सात से नौ महीने का समय लग जाता है. इस बीच हर महीने गमले में थोड़ी सी कंपोस्ट खाद डालते रहें जिससे पौधे को पूरा पोषण मिलता रहे. सर्दियों के खत्म होते-होते, जनवरी से फरवरी के दौरान जब पौधे के पत्ते सूखने लगें पीले पड़कर नीचे झुक जाएं. तब समझ लीजिए कि आपकी मेहनत रंग ला चुकी है.
इस स्टेज पर गमले में पानी डालना एकदम बंद कर दें. जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाए तब खुरपी की मदद से मिट्टी ढीली करके सारी हल्दी बाहर निकाल लें. गांठों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर मिट्टी अलग कर लें. आपके किचन के लिए एकदम खुशबूदार असली हल्दी तैयार है. इसे कच्चा इस्तेमाल करें चाहें तो धूप में सुखाकर पीस लें और शुद्ध हल्दी पाउडर बना लें.

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