उत्तर प्रदेश में धान की कटाई का समय पास आते ही रबी सीजन की तैयारियां बहुत तेजी से शुरू हो चुकी हैं. यूपी के हर एक जिले का किसान ठंड के सीजन को लेकर अपनी प्लानिंग करने में लग गया है. लेकिन इस बार बदलते मौसम और बाजार के हालातों को देखकर किसानों के मन में यही सवाल यही आ रहा है कि इस सर्दी के मौसम में गेहूं की बढ़िया पैदावार किस तरह हासिल की जा सकती है. उन्हें इसके लिए अभी से क्या खास तैयारियां करनी होंगी.
गेहूं की खेती को लेकर कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैज्ञानिक और स्मार्ट तरीकों से गेहूं की खेती की जाए. तो किसानों की आमदनी में बहुत जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि इस बार यूपी के खेतों में गेहूं की बंपर फसल उगाने के लिए किसानों को अभी से कौन-कौन से जरूरी कदम उठाने चाहिए.
ऐसे शुरू करें तैयारी
उत्तर प्रदेश की खेती की रीढ़ माने जाने वाले गेहूं की बुआई के लिए भले ही नवंबर के आखिरी हफ्ते तक का समय सही माना जाता हो. लेकिन इसकी सही तैयारी आज से ही शुरू करनी होगी. आज के इस वक्त में क्लाइमेट चेंज की वजह से सर्दियों के मौसम में तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इससे निपटने के लिए इस बार किसानों को पुराने और पारंपरिक बीजों की बजाय ऐसे नए बीजों का चुनाव करना चाहिए जो मौसम की मार को आसानी से झेल सकें.
इन्हें खेती की भाषा में जलवायु-अनुकूल और रोग-प्रतिरोधी किस्में कहा जाता है, यानी ऐसी फसलें जिन पर मौसम बदलने या बीमारियों का असर आसानी से नहीं होता. कृषि वैज्ञानिक लगातार ऐसी ही नई वैराइटी लगाने की सलाह दे रहे हैं जिससे अचानक पाला पड़ने या गर्मी बढ़ने पर भी फसल को कोई बड़ा नुकसान न पहुंचे. एकदम सही, प्रमाणित और उन्नत बीज का चयन करना ही आपको बंपर पैदावार दिलवाता है. जिससे आगे चलकर गेहूं की क्वालिटी भी बहुत शानदार मिलती है.

खेत की गहरी जुताई और मिट्टी की जांच
बुआई शुरू करने से ठीक पहले खेत की सही और मजबूत तैयारी होना बहुत जरूरी है. क्योंकि इसी बात पर आपकी फसल की शुरुआती ग्रोथ टिकी होती है. सभी किसानों को बुआई से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच किसी नजदीकी सरकारी कृषि केंद्र से जरूर करवा लें. इससे साफ पता चल जाता है कि आपकी जमीन में नाइट्रोजन, फास्फोरस और दूसरे कौन से पोषक तत्वों की कमी है और आपको किस खाद की जरूरत है.
इसके बाद खेत की अच्छी तरह गहरी ट्रैक्टर से जुताई करवाकर पाटा लगा देना चाहिए. जिससे मिट्टी एकदम भुरभुरी और मुलायम हो जाए और जमीन के अंदर नमी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहे. अगर आपके खेत में पहले कभी दीमक, फंगस या फालतू घास-फूस की समस्या रही है. तो जुताई के वक्त ही उसका सगी इलाज कर लेना बुद्धिमानी है. ऐसा करने से पौधे शुरुआती दौर से ही पूरी तरह सुरक्षित और तंदुरुस्त रहते हैं.

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खाद का सही संतुलन और समय पर सिंचाई
गेहूं के खेती में अगर किसानों को तगड़ा मुनाफा चाहिए तो वह तभी मिल सकता है जब खाद और पानी सही तरीके से फसल को दिया जाए. बुआई के समय जमीन में बेसल डोज यानी शुरुआती खाद के रूप में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का सही और संतुलित अनुपात इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है, जिससे पौधों की जड़ें बहुत तेजी से फैलती हैं और मजबूत होती हैं.
इसके अलावा फसल लगे रहने तक सिंचाई कब-कब करनी है इसका भी खास ध्यान रखना बहुत जरूरी है. खासकर पहली हल्की सिंचाई पौधे में कल्ले फूटने के शुरुआती समय पर और दूसरी जरूरी सिंचाई बालियां बाहर निकलते समय करने से पौधे बहुत मजबूत हो जाते हैं. अगर इन सभी वैज्ञानिक और आधुनिक बातों का समय रहते सही ढंग से ध्यान रखा जाए. तो इस सर्दी यूपी के खेतों में गेहूं की सुनहरी बालियां लहलहा उठेंगी और किसानों को उनकी मेहनत का एकदम बढ़िया मुनाफा मिलेगा.
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