Agriculture

खेत में खरपतवार से परेशान? अपनाएं ये तकनीक

N
ABP News
September 17, 20264 min read
खेत में खरपतवार से परेशान? अपनाएं ये तकनीक

खेती में जितनी मेहनत बीज बोने से लेकर फसल काटने तक करनी पड़ती है. उससे कहीं ज्यादा सिरदर्द खेतों में उगने वाला फालतू घास-फूस यानी खरपतवार बन जाता है. फसल के साथ उगने वाले ये अनचाहे पौधे चुपचाप जमीन के अंदर की सारी ताकत, खाद, पानी और धूप को खींच लेते हैं, जिसकी वजह से असली फसल को पोषण नहीं मिल पाता और पैदावार घटकर आधी रह जाती है. किसान इस बात को अच्छे से जानते हैं कि अगर समय रहते इस जंगली घास का इलाज नहीं निकाला.

तो सालभर की मेहनत पर पानी फिरते देर नहीं लगती. पारंपरिक तरीकों से निराई-गुड़ाई करने में मजदूरों का खर्चा और समय दोनों बहुत ज्यादा बर्बाद होते हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है और मुनाफा हाथ से निकल जाता है. अब वक्त आ गया है कि पुराने ढर्रे को छोड़कर कुछ स्मार्ट और आधुनिक तकनीक अपनाई जाए. जिससे फसल को नुकसान पहुंचाए बिना इन खरपतवारों का पूरी तरह सफाया किया जा सके. चलिए आपको समझाते हैं कि इस समस्या से निपटने के लिए आपको क्या तकनीक अपनानी चाहिए.

मल्चिंग तकनीक से होता है फायदा

खरपतवारों को बढ़ने से रोकने के सबसे बढ़िया तरीकों में से एक है मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करना. जो आजकल बड़े पैमाने पर किसानों के बीच पॉपुलर हो रही है. इसमें होता यह है कि फसल की कतारों के बीच तो कई फसलों में पूरे खेत की मिट्टी को स्पेशल प्लास्टिक शीट जिसे मल्च फिल्म भी कहते हैं उससे ढक दिया जाता है. इससे होता क्या है कि जब खेत की मिट्टी पर सूरज की रोशनी यानी धूप पड़ना बंद हो जाती है. तो खरपतवार के बीज अंदर ही दम तोड़ देते हैं और उन्हें उगने का मौका ही नहीं मिलता.

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि एक तरफ जहां जंगली घास पूरी तरह दब जाती है. वहीं दूसरी तरफ जमीन के अंदर की नमी भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है. जिससे बार-बार पानी देने की परेशानी से भी छुटकारा मिल जाता है. इसके अलावा फसल की जड़ें एकदम सुरक्षित और साफ-सुथरी रहती हैं. जिससे पौधों की ग्रोथ बहुत तेजी से होता है और आपकी लागत भी काफी हद तक कम हो जाती है.


मल्चिंग के टाइप और सही मोटाई का चुनाव

मल्चिंग तकनीक का पूरा फायदा उठाने के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि खेत में किस तरह की मल्च शीट या सामग्री का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. बाजार में अलग-अलग मोटाई और रंगों की प्लास्टिक मल्च फिल्में उपलब्ध होती हैं. जो कि सीजन और फसल के हिसाब से सिलेक्ट की जाती हैं. सर्दियों और गर्मियों के मौसम में ब्लैक एंड व्हाइट मल्च का इस्तेमाल सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. क्योंकि यह जमीन के तापमान को कंट्रोल रखती है.

किसानों को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मल्च शीट की मोटाई कम से कम 25 से 30 माइक्रोन होनी चाहिए जिससे वह लंबे समय तक टिक सके और फटे नहीं. इसके अलावा जो किसानभाई प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. वे सूखी पराली, गन्ने की खोई या पुआल की मोटी परत बिछाकर भी नेचुरल मल्चिंग कर सकते हैं. इससे समय के साथ वह कचरा खाद में बदल जाता है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को और ज्यादा बढ़ा देता है.


यह भी पढ़ें: दिल्ली की किस मंडी में मिलेगा आपकी फसल का सही दाम? समझें हिसाब

खेत में मल्चिंग बिछाने का सही तरीका

मल्चिंग तकनीक को अपने खेत में लागू करने से पहले जमीन की तैयारी बहुत तरीके से करनी होती है. सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसमें सही मात्रा में खाद और पानी दे दें जिससे नमी अंदर ही लॉक हो जाए. इसके बाद ड्रिप सिंचाई के पाइप बिछाकर उसके ऊपर मल्च शीट को सही तरीके से फैला दिया जाता है और किनारों पर मिट्टी दबा दी जाती है जिससे हवा उसे उड़ा न सके.

तय दूरी पर छोटे छेद करके उसमें पौधे या बीज बो दिए जाते हैं. जिससे सिर्फ मुख्य पौधा ही बाहर निकलता है और बाकी पूरी जमीन ढकी रहती है. इस तकनीक को अपनाने से न सिर्फ खरपतवारों खत्म हो जाती है. बल्कि पैदावार भी एकदम बढ़िया मिलती है और किसानों को बार-बार निराई-गुड़ाई की मेहनत से हमेशा के लिए छुट्टी मिल जाती है.

यह भी पढ़ें: यूपी में इस सर्दी किस फसल का रहेगा दबदबा? अभी से कर लें तैयारी

Topics & Tags:#Agriculture
खेत में खरपतवार से परेशान? अपनाएं ये तकनीक | Kisan Reporter