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पीएम कुसुम योजना क्या है, इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं किसान?

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ABP News
September 21, 20263 min read
पीएम कुसुम योजना क्या है, इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं किसान?

किसानों के लिए सिंचाई की लागत कम करने और खेती में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना शुरू की थी. इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में डीजल की निर्भरता घटाना, किसानों को सिंचाई के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना और सौर ऊर्जा के जरिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है. जानिए इस योजना के आवेदन करने के सही तरीके के बारे में.

पीएम कुसुम योजना में क्या मिलता है?

इस योजना के तहत ऐसे क्षेत्रों में स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप लगाने के लिए सहायता दी जाती है जहां ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है. राज्य सरकार को कम से कम 30 प्रतिशत सब्सिडी देनी होती है और बाकी अधिकतम 40 प्रतिशत राशि किसान के हिस्से में आती है. ऐसे में बैंक लोन की सुविधा मिलने पर किसान को शुरुआत में कम राशि देना होती है.

पुराने पंप को भी सोलर कर सकते हैं

अगर किसान के पास पहले से ग्रिड से जुड़ा कृषि पंप है तो पीएम-कुसुम के तहत उसके सोलराइजेशन की व्यवस्था की जा सकती है. इसमें सोलर पीवी क्षमता पंप की किलोवाट क्षमता के दो गुना तक रखी जाती है. किसान सौर ऊर्जा का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कर सकता है और अतिरिक्त बिजली को संबंधित बिजली वितरण कंपनी यानी DISCOM को बेच सकता है. इसके लिए भुगतान राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित टैरिफ के अनुसार किया जाता है. जिससे किसान आय भी कमा सकता है.

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जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर कमाई

पीएम-कुसुम किसानों के लिए अलग तरह का अवसर देता है. इसके तहत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायत, FPO और जल उपयोगकर्ता संघ 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के ग्रिड-कनेक्टेड नए ऊर्जा संयंत्र लगवा सकते हैं. इससे पैदा होने वाली बिजली DISCOM द्वारा राज्य नियामक आयोग से निर्धारित फीड-इन टैरिफ पर खरीदी जाती है. यदि किसान खुद संयंत्र लगाने के लिए पैसे नहीं जुटा पाता तो डेवलपर या स्थानीय DISCOM के माध्यम से परियोजना विकसित करने का विकल्प भी मौजूद है.

किसानों को क्या फायदा होगा?

सोलर पंप से डीजल पर होने वाला खर्च कम होता है और सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है. सोलर पंप से दिन के समय सिंचाई की सुविधा मिलने और अतिरिक्त फसल लेने की संभावना बढ़ सकती है. आवेदन की प्रक्रिया राज्य के कार्यान्वयन विभाग के माध्यम से होती है. इसके बाद संबंधित राज्य पोर्टल या आधिकारिक कार्यान्वयन एजेंसी के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है.

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