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अलर्ट हो जाएं गन्ना किसान, फसल में रेड रॉट का खतरा बढ़ा

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ABP News
August 31, 20263 min read
अलर्ट हो जाएं गन्ना किसान, फसल में रेड रॉट का खतरा बढ़ा

गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए इन दिनों एक बड़ी चिंता की खबर सामने आ रही है. बारिश के मौसम में गन्ने की फसल पर रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. यह एक फफूंद से होने वाला रोग है, जिसे किसान अक्सर "गन्ने का कैंसर" भी कहते हैं. अगर समय रहते इसकी पहचान करके रोका नहीं गया, तो यह पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर किसान इसमें करें क्या. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.

बारिश में तेजी से फैलता है यह रोग

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रोग कोलेटोट्राइकम फाल्केटम नाम की फफूंद से फैलता है. जब लगातार बारिश होती है, खेत में नमी ज्यादा रहती है और पानी भर जाता है, तब यह रोग बहुत तेजी से फैलता है. और जब एक बार अगर ये संक्रमण शुरू हो जाए, तो यह आसपास के स्वस्थ पौधों को भी अपनी चपेट में ले लेता है. यह रोग गन्ने के अंदरूनी हिस्से यानी तने और गांठों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे गन्ने की गुणवत्ता और उसमें से निकलने वाली चीनी की मात्रा दोनों कम हो जाती हैं. देशभर की बात करें तो भारत के कुल गन्ना क्षेत्र का करीब 49 प्रतिशत हिस्सा और देश की कुल चीनी उत्पादन का करीब 33 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से आता है, इसलिए यहां के किसानों को खासतौर पर सावधान रहने की सलाह दी जाती है.

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ऐसे पहचानें बीमारी के लक्षण

रेड रॉट की पहचान करने के लिए किसान गन्ने के तने को बीच से काटकर देख सकते हैं. अगर पौधा संक्रमित है, तो अंदर का हिस्सा लाल रंग का दिखाई देता है. कई बार इस लाल हिस्से पर सफेद रंग के छोटे-छोटे धब्बे भी नजर आते हैं. शुरुआत में गन्ना बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखता है, इसलिए बहुत से किसान इसे तुरंत पहचान नहीं पाते और बीमारी फैलती चली जाती है. इसलिए किसान को समझना होगा कि पत्तियों का रंग बदलना, पौधों का मुरझाना और तने से अजीब सी गंध आने वाले इस रोग के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि किसानों को अपने खेत का नियमित निरीक्षण करना चाहिए, खासकर बारिश के मौसम में. अगर किसी पौधे में लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत उखाड़कर खेत से दूर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि रोग बाकी पौधों तक न पहुंचे.

बचाव के लिए क्या करें किसान

रेड रॉट से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि खेत में पानी न भरने दें और सही जल निकासी का इंतजाम रखें, क्योंकि ज्यादा नमी ही इस रोग को बढ़ावा देती है. बुवाई के समय हमेशा रोगमुक्त और प्रमाणित बीज गन्ने का ही इस्तेमाल करें. साथ ही जिस खेत में पहले यह बीमारी आ चुकी है, वहां लगातार गन्ने की फसल न लगाकर कोई दूसरी फसल लगानी चाहिए. संक्रमित पौधों को जड़ से उखाड़कर जला देना चाहिए, ताकि फफूंद आगे न फैले.

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