Bathua Farming: जैसे ही सर्दियों की शुरुआत होती है, बाजार में हरी पत्तेदार सब्जियों की मांग बढ़ने लगती है. इसी मौसम में बथुआ भी घरों की रसोई से लेकर सब्जी मंडियों तक आसानी से नजर आने लगता है. अगर घर या फार्म हाउस के आसपास थोड़ी खाली जमीन पड़ी है, तो किसान उसमें बथुआ उगाकर कम समय में कमाई शुरू कर सकते हैं. इसकी खास बात यह है कि बथुआ जल्दी तैयार हो जाता है और एक बार बोने के बाद इसकी पत्तियों की कई बार कटाई की जा सकती है.
बथुए की खेती करने वाले किसानों के लिए एक और अच्छी बात है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने काशी बथुआ-4 नाम की किस्म विकसित की है. यह किस्म उत्तर प्रदेश के लिए घोषित और लागू है और करीब 40-45 दिन में पहली कटाई के लिए तैयार हो सकती है. यानी ज्यादा लंबा इंतजार किए बिना किसान इसकी हरी पत्तियां बाजार में बेच सकते हैं.
ऐसी मिट्टी में अच्छी होती है फसल
अब सवाल आता है कि बथुआ उगाने के लिए जमीन कैसी होनी चाहिए. इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में पानी ज्यादा देर तक जमा नहीं रहता और पौधे भी अच्छी तरह बढ़ते हैं. मिट्टी का पीएच करीब 6 से 8 के बीच हो तो बथुए की फसल के लिए ठीक माना जाता है. आम तौर पर अक्टूबर-नवंबर का समय इसकी बुवाई के लिए अच्छा रहता है.
बुवाई से पहले खेत तैयार करें
अब बथुआ उगाने की तैयारी की बात करें तो सबसे पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है. इसके लिए खेत की 2 से 3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा कर लें. इसके बाद खेत को समतल करें, ताकि पानी कहीं ज्यादा जमा न हो. मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिला देने से भी पौधों को अच्छी बढ़वार मिलती है. बथुए के बीज काफी छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें मिट्टी के बहुत अंदर दबाने की जरूरत नहीं होती.
अगर सीधे खेत में बुवाई कर रहे हैं तो करीब 1.5 से 2 किलो बीज प्रति हेक्टेयर काफी रहता है. बीज को रेत में मिलाकर कतारों में डालेंगे तो बुवाई आसानी से हो जाएगी. कतार से कतार की दूरी करीब 30 से 40 सेंटीमीटर रखें और बीज को लगभग आधा से 1 सेंटीमीटर गहराई पर ही बोएं. बथुआ बोने के बाद हल्की सिंचाई करें. इसके बाद मिट्टी में नमी देखकर 10 से 12 दिन के अंतर पर पानी दे सकते हैं. खेत में पानी जमा न होने दें और समय-समय पर खरपतवार निकालते रहें.
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40-45 दिन में शुरू हो सकती है कटाई
बथुआ जल्दी तैयार होने वाली फसल है. सामान्य तौर पर 40 से 50 दिन में पहली कटाई शुरू हो सकती है. इसके बाद 15 से 20 दिन के अंतर पर पत्तियां काटी जा सकती हैं. पौधे को जड़ से न उखाड़ें, ऊपर की पत्तियां और नरम टहनियां काटें, ताकि नई पत्तियां आती रहें.
फार्म हाउस में खाली जगह है तो वहां बथुए की छोटी-छोटी क्यारियां बनाकर खेती कर सकते हैं. इससे घर के लिए ताजी सब्जी के साथ अतिरिक्त कमाई भी हो सकती है. हालांकि कमाई बाजार के भाव और मांग पर निर्भर करेगी.
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