KCC Loan: पंजाब में पैक्स से जुड़े किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के नियम बदल गए हैं. नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए रबी सीजन से लागू हो गए हैं. अब किसानों को KCC से मिलने वाले कर्ज के हिसाब से पहले से ज्यादा शेयर मनी देनी होगी. समय पर कर्ज चुकाने पर मिलने वाली ब्याज में छूट के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं.
नए नियम के तहत 5 एकड़ तक जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को अपनी KCC सीमा का 6 फीसदी शेयर मनी देना होगा. पहले यह 3 फीसदी था. यानी अब छोटे किसानों को पहले के मुकाबले दोगुनी राशि जमा करनी होगी. वहीं, बड़े किसानों के लिए शेयर मनी 3 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी कर दी गई है. यानी कि, किसान की KCC सीमा जितनी ज्यादा होगी शेयर मनी भी उसी हिसाब से बढ़ेगी.
ब्याज में छूट को लेकर भी बदला नियम
अब बात कर्ज चुकाने पर मिलने वाली ब्याज छूट की. KCC के तहत समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को ब्याज में राहत मिलती है, लेकिन अब इस पर नई शर्त लागू होगी. अगर किसी किसान ने पहले ही वाणिज्यिक बैंक से 3 फीसदी ब्याज छूट ले ली है, तो पैक्स से लिए कर्ज पर उसी छूट का दोबारा फायदा नहीं मिलेगा. पहले किसान का कर्ज पैक्स और वाणिज्यिक बैंक दोनों जगह होने पर भी 3 लाख रुपये तक के कर्ज पर ब्याज छूट मिल सकती थी.
पैक्स की कमाई पर भी असर
किसानों के साथ इन नए नियमों का असर पैक्स पर भी पड़ सकता है. सरकार ने पैक्स को मिलने वाला मार्जिन 2 फीसदी से घटाकर 0.5 फीसदी कर दिया है. पंजाब में करीब 3,500 पैक्स हैं, ऐसे में उनकी कमाई पर भी असर पड़ सकता है. जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब की 3,482 पैक्स को कंप्यूटर से जोड़ने की मंजूरी मिली थी और इनमें से 3,454 पैक्स को ईआरपी सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा चुका था.
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पहले बढ़ाई गई थी फसल कर्ज की सीमा
इन बदलावों से पहले किसानों के लिए फसल कर्ज की सीमा भी बढ़ाई गई थी. पहले रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए 25,400 रुपये प्रति एकड़ की सीमा थी. बाद में धान के लिए 39,000 रुपये और गेहूं के लिए 30,000 रुपये प्रति एकड़ की सीमा तय की गई. इस बदलाव पर सहकारी बैंकों ने भी आपत्ति जताई थी.
किसान कर रहे नियमों की समीक्षा की मांग
नए नियमों को लेकर किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ज्यादा शेयर मनी और पैक्स का कम मार्जिन किसानों और समितियों, दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है. वहीं, सहकारिता विभाग का कहना है कि बदलाव का मकसद सहकारी कर्ज व्यवस्था को आर्थिक रूप से मजबूत और लंबे समय तक चलने लायक बनाना है.
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