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रेगिस्तान के किसान इन नस्ल की गायों पर रखें फोकस, गर्मी में भी नहीं होंगी बीमार

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ABP News
October 8, 2026•3 min read
रेगिस्तान के किसान इन नस्ल की गायों पर रखें फोकस, गर्मी में भी नहीं होंगी बीमार

Dairy Farming Tips: राजस्थान जैसे गर्म और सूखे इलाकों में पशुपालन किसानों की कमाई का बड़ा जरिया है. यहां तेज गर्मी, पानी की कमी और चारे की परेशानी पशुओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. ऐसे में अगर आप गाय पालन शुरू करने की सोच रहे हैं तो सबसे जरूरी है नस्ल का चुनाव करना. इन इलाकों के लिए देसी नस्लों को चुनना फायदेमंद हो सकता है, जो लंबे समय से गर्म और मुश्किल मौसम वाले इलाकों में पाली जाती रही हैं.

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी NDDB के मुताबिक, देसी नस्ल की गायें अपने इलाके के मौसम में आसानी से रह लेती हैं. इनमें गर्मी और यहां की कुछ आम बीमारियों को सहने की क्षमता भी ज्यादा होती है. कम चारा मिलने पर भी ये आसानी से रह सकती हैं. वहीं, विदेशी नस्ल और कई क्रॉस ब्रीड गायों को ज्यादा गर्मी में पालना और संभालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

राठी गाय से शुरू करें बात

गर्म और सूखे इलाकों में अगर आप गाय पालने की सोच रहा है, तो राठी गाय एक अच्छा ऑप्शन हो सकती है. बीकानेर और श्रीगंगानगर को इस नस्ल का मूल इलाका माना जाता है. यानी राठी गाय ऐसे मौसम में पली-बढ़ी है, जहां तेज गर्मी आम बात है. यह एक अच्छी दूध देने वाली देसी नस्ल है. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी NDDB भी राठी को देश की प्रमुख दुधारू नस्लों में गिनता है.

थारपारकर भी गर्मी में साथ निभाती है

अगर बात सबसे गर्म इलाकों की हो, तो थारपारकर गाय का नाम भी सामने आता है. इस नस्ल का मूल इलाका जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर माना जाता है. मतलब, थारपारकर ऐसे इलाके की गाय है जहां गर्मी के साथ पानी की कमी भी रहती है. ICAR के मुताबिक, यह नस्ल कठिन और गर्म मौसम में भी अच्छी तरह काम कर सकती है.

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कांकरेज और साहीवाल भी दे सकते हैं विकल्प

गर्मी वाले इलाकों में किसानों के पास सिर्फ राठी और थारपारकर का ही ऑप्शन नहीं है. कांकरेज भी ऐसी देसी नस्ल है, जिसका संबंध गुजरात और राजस्थान से है. यह गाय दूध देने के साथ खेती के काम में भी इस्तेमाल होती है. दूसरी तरफ, साहीवाल देश की प्रमुख दूध देने वाली नस्लों में शामिल है. इसका मूल इलाका पंजाब के साथ राजस्थान का श्रीगंगानगर भी माना जाता है. ICAR के मुताबिक, साहीवाल गाय में ज्यादा गर्मी को सहने की क्षमता भी पाई जाती है.

नस्ल के साथ देखभाल भी जरूरी

  • गर्मी सहने वाली गाय खरीद लेना ही काफी नहीं है.
  • तेज धूप और गर्मी से पशु को बचाना भी जरूरी है.
  • गर्मी ज्यादा पड़ने पर गाय ज्यादा पानी पीती है और चारा कम खाने लगती है.
  • इसका असर दूध पर भी पड़ सकता है.
  • इसलिए गाय के लिए छायादार जगह, साफ पानी और भरपूर चारे का इंतजाम रखें.
  • गर्मी से बचाने के लिए पशु को समय-समय पर पानी से ठंडा करना भी मददगार हो सकता है.

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