Agriculture

ऊपर से हरी दिख रही गेहूं की फसल, फिर क्यों कम हो जाती है पैदावार?

N
ABP News
October 18, 2026•3 min read
ऊपर से हरी दिख रही गेहूं की फसल, फिर क्यों कम हो जाती है पैदावार?

गेहूं की खेती करने वाले की किसानों के साथ अक्सर ऐसा होता है कि उनकी फसल देखने में बेहद लहलहाती और हरी-भरी नजर आती है. किसान को लगता है कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ बंपर पैदावार होगी, लेकिन जब कटाई का समय आता है तो उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिलता. दाने पतले, हलके और मरे हुए निकलते हैं. अक्सर फसल ऊपर से बिल्कुल स्वस्थ और हरी दिखती है, लेकिन पौधे का अंदरूनी संतुलन पूरी तरह बिगड़ा हुआ होता है. अगर आप भी एक किसान हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों होता है.

यरिया जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल

अधिकतर किसान भाई सोचते हैं कि खेत में जितना ज्यादा यूरिया डालेंगे, फसल उतनी ही अच्छी होगी. यूरिया डालने से गेहूं का पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है और उसका रंग गहरा हरा हो जाता है. लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से पौधा केवल ऊपर से अच्छा दिखता है, जबकि उसका तना अंदर से बहुत कमजोर और खोखला रह जाता है. ऐसी स्थिति में जब मार्च के महीने में तेज हवाएं चलती हैं, तो यह भारी और कमजोर पौधे नीचे गिर जाते हैं, जिससे गेहूं पूरी तरह पक नहीं पाता और पैदावार 20 से 30 फीसदी तक घट जाती है.

पोटैशियम और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी

गेहूं के पौधे को सिर्फ यूरिया और डीएपी की ही जरूरत नहीं होती, बल्कि उसे पोटैशियम, जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी सख्त आवश्यकता होती है. जब खेत में पोटैशियम की कमी होती है, तो पौधा मौसम के उतार-चढ़ाव और सूखे के तनाव को सहन नहीं कर पाता.

वहीं जिंक की कमी के कारण पौधे के भीतर दानों का विकास रुक जाता है. यूरिया के दम पर फसल ऊपर से तो हरी-भरी दिखाई देती है, लेकिन इन जरूरी पोषक तत्वों के बिना बालियों में दानों का भराव सही से नहीं होता और दाने पतले व हल्के रह जाते हैं.

मार्च के महीने में अचानक तापमान का बढ़ना

जब फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में गेहूं की बालियों में दाने बनने और पकने का समय होता है, तब अचानक तापमान में भारी बढ़ोतरी हो जाती है. तेज गर्मी और गर्म हवाओं के कारण पौधे के भीतर का मॉइस्चर बहुत जल्दी सूख जाता है. तापमान बढ़ने से दाने पूरी तरह विकसित होने से पहले ही सूखकर सिकुड़ जाते हैं. यही वजह है कि फसल ऊपर से हरी दिखने के बावजूद अंदर से दानों का वजन कम हो जाता है और कुल उत्पादन गिर जाता है.

यह भी पढ़ें: गन्ने से बने इथेनॉल की नहीं होगी खरीद, सरकार का बड़ा फैसला

सिंचाई का गलत समय और वाटरलॉगिंग की समस्या

पहली सिंचाई के समय या बालियां निकलते समय अगर खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो जाए, तो जड़ों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है. अत्यधिक पानी लगने से जड़ें सड़ने लगती हैं और पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता खत्म हो जाती है. भले ही नाइट्रोजन के असर से पत्तियां हरी दिखाई दें, लेकिन अंदर से पौधा पूरी तरह तनाव में आ जाता है, जिसका सीधा असर गेहूं की अंतिम पैदावार और दानों की क्वालिटी पर पड़ता है.

यह भी पढ़ें: कैसे शुरू कर सकते हैं नर्सरी बिजनेस, जान लें पूरा प्रॉसेस

Topics & Tags:#Agriculture
ऊपर से हरी दिख रही गेहूं की फसल, फिर क्यों कम हो जाती है पैदावार? | Kisan Reporter