Paddy Procurement: धान की नई फसल मंडियों में पहुंचने लगी है, लेकिन इस बार कई राज्यों में किसानों को धान के अच्छे दाम मिल रहे हैं. कुछ जगहों पर तो बाजार भाव सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी ऊपर चल रहा है. कर्नाटक में धान का औसत भाव 5,400 रुपये प्रति क्विंटल से भी ज्यादा पहुंच गया है.
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए सामान्य धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. वहीं, ग्रेड-ए धान के लिए किसानों को 2,461 रुपये प्रति क्विंटल देने का फैसला किया गया है. हालांकि, मंडियों में धान के भाव इससे ऊपर या नीचे भी हो सकते हैं. ये दाम धान की किस्म, उसकी क्वालिटी, मंडी और फसल की आवक पर निर्भर करते हैं.
कर्नाटक में 5,400 रुपये के पार पहुंचा धान का भाव
एगमार्कनेट पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक,
- कर्नाटक में धान का औसत बाजार भाव 5,418.14 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है.
- यह सामान्य धान के एमएसपी से करीब 2,977 रुपये ज्यादा है.
- दिल्ली में धान का औसत बाजार भाव 3,522.06 रुपये प्रति क्विंटल रहा.
- राजस्थान में धान का औसत बाजार भाव 3,554.81 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.
हालांकि, मंडियों में भाव किस्म, क्वालिटी, जगह और आवक के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए फसल बेचने से पहले अपनी नजदीकी मंडी का ताजा भाव जरूर पता कर लें.
कम बारिश से घटा धान का रकबा
धान के दाम बढ़ने के पीछे कम बारिश और उत्पादन को लेकर बनी चिंता भी एक वजह मानी जा रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में कम बारिश के चलते पिछले साल के मुकाबले धान की खेती का रकबा 15 लाख हेक्टेयर से ज्यादा घटा है. इससे इस बार कुल उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
यह भी पढ़ें: गन्ने से बने इथेनॉल की नहीं होगी खरीद, सरकार का बड़ा फैसला
पिछले साल के मुकाबले भी बढ़े धान के दाम
धान के भाव में तेजी केवल MSP के मुकाबले ही नहीं, बल्कि पिछले साल की तुलना में भी दिखाई दे रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में धान का औसत भाव 42.6 फीसदी बढ़कर 2,781 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. राजस्थान में यह 45.4 फीसदी बढ़कर 3,554 रुपये और मध्य प्रदेश में 31.8 फीसदी बढ़कर 3,450 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.
9 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच देशभर में धान का औसत भाव 2,791 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 19.2 फीसदी ज्यादा है. ऐसे में किसानों को सलाह है कि जल्दबाजी में फसल बेचने के बजाय मंडी के भाव, धान की किस्म और स्थानीय मांग को देखकर फैसला लें.
यह भी पढ़ें: गेहूं का MSP बढ़ा, लेकिन इससे किसानों की कमाई कितनी बढ़ेगी?
