Kuttu Ki Kheti: व्रत के समय बहुत से घरों में कुट्टू का आटा इस्तेमाल किया जाता है. इससे रोटी से लेकर चीला तक कई चीजें बनाई जा सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, जिस कुट्टू के आटे को लोग व्रत के दौरान बड़ें चाव के साथ खाते हैं उसकी खेती से किसान भी अच्छी कमाई कर सकते हैं.
कुट्टू एक कम समय में तैयार होने वाली फसल है. इसकी खेती ज्यादातर पहाड़ी और ठंडे इलाकों में की जाती है. हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए किसान को मौसम, मिट्टी और बीज का सही चुनाव करना जरूरी है.
कुट्टू की खेती के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी?
- कुट्टू की फसल के लिए ऐसी जमीन अच्छी रहती है, जहां पानी जमा न हो.
- बलुई दोमट और दोमट मिट्टी में इसकी खेती अच्छी हो सकती है.
- यह फसल कम उपजाऊ जमीन में भी उग सकती है.
- बहुत ज्यादा गर्मी और सूखे का असर इसकी पैदावार पर पड़ता है.
कब करें कुट्टू की बुवाई?
कुट्टू की बुवाई का समय हर इलाके में एक जैसा नहीं होता. पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती मौसम और ऊंचाई के हिसाब से अलग-अलग समय पर की जाती है. पूर्वोत्तर के कुछ पहाड़ी इलाकों में इसकी बुवाई अक्टूबर से दिसंबर के बीच भी की जाती है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में समय अलग हो सकता है. इसलिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सही समय की जानकारी लेकर ही बुवाई करें.
खेत तैयार करने और बीज चुनने का तरीका
कुट्टू की बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें. खेत में पानी निकलने की सही व्यवस्था होनी चाहिए. बुवाई के लिए साफ और अच्छी क्वालिटी वाले बीज चुनें. बीज की मात्रा किस्म और खेती के तरीके पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर दाने के लिए इसकी खेती में करीब 35 से 40 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत पड़ सकती है. बीज को उचित दूरी पर कतारों में बोने से पौधों को बढ़ने के लिए जगह मिलती है.
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सिंचाई और खाद का रखें ध्यान
कुट्टू की फसल में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन पौधों की बढ़त और फूल आने के समय मिट्टी में नमी रहना जरूरी है. अगर बारिश कम हो और खेत सूखने लगे, तो जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. खाद का इस्तेमाल भी मिट्टी की जरूरत के मुताबिक करें. बिना जानकारी के ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद डालने से पौधे कमजोर होकर गिर सकते हैं और पैदावार घट सकती है.
कितने दिन में तैयार होती है फसल?
कुट्टू की कुछ जल्दी पकने वाली किस्में करीब 60 से 70 दिनों में तैयार हो सकती हैं. फसल पकने पर इसके दानों को निकालकर अच्छी तरह सुखाया जाता है. इसके बाद दानों की ऊपरी परत हटाकर उन्हें पीसा जाता है, जिससे कुट्टू का आटा तैयार होता है.
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