भारत के ग्रामीण इलाकों में रबी सीजन की फसलों की बुवाई की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. गेहूं, सरसों और आलू जैसी मुख्य फसलों के साथ-साथ लहसुन की खेती भी किसानों के लिए एक्स्ट्रा और मोटी कमाई का एक बेहतरीन जरीया माना जाता है. नगदी फसल होने के कारण लहसुन की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसानों को इसका अच्छा भाव मिलता है. हालांकि, लहसुन की खेती में सबसे महत्वपूर्ण कदम सही किस्म का चुनाव करना होता है. बुवाई से पहले अगर किसान उन्नत और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्मों के बारे में जान लें, तो वे कम लागत में दोगुनी तक उपज हासिल कर सकते हैं.
सुपर शंकर और भीमा पर्पल, कम समय में बंपर मुनाफा
लहसुन की नई और सबसे लोकप्रिय किस्मों में सुपर शंकर का नाम सबसे ऊपर आता है. हरियाणा और मध्यप्रदेश के इलाकों में इसकी खेती खूब की जा रही है. इसके कंद बड़े आकार के और चमकदार सफेद होते हैं, जिन्हें आसानी से छीला जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे 7 से 8 महीने तक सुरक्षित स्टोर करके रखा जा सकता है.
इसके अलावा, भीमा पर्पल भी एक बेहतरीन किस्म है जो मात्र 135 से 140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. हल्के बैंगनी रंग की यह वैरायटी उत्तरप्रदेश, बिहार, पंजाब और राजस्थान की मिट्टी के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है.
यमुना सफेद और जी-282, बाजार में सबसे ऊंची मांग
किसानों के बीच यमुना सफेद सीरीज (जी-1 से लेकर जी-5 तक) काफी समय से भरोसेमंद बनी हुई है. यह चांदी के जैसे सफेद होती है, जिससे इन्हें बाजार में सबसे ऊंचा भाव मिलता है. यह 130 से 150 दिनों में पकने वाली किस्म है, जिससे एकड़ 50 से 70 क्विंटल तक का उत्पादन लिया जा सकता है.
मध्यप्रदेश और राजस्थान के कोटा संभाग के किसानों के लिए जी-282 वैरायटी पहली पसंद है. इसका कंद काफी मोटा होता है और अच्छी देखरेख करने पर यह प्रति हेक्टेयर 175 से 200 क्विंटल तक की बंपर उपज देने की क्षमता रखती है.
बुवाई का सही समय और बीजों की मात्रा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लहसुन की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है. अगर बुवाई नवंबर के आखिरी हफ्ते के बाद की जाती है, तो ठंड बढ़ने के कारण बीजों के अंकुरण में समस्या आने लगती है. बीज दर की बात करें तो एक हेक्टेयर खेत के लिए करीब 400 से 500 किलोग्राम स्वस्थ कलियों की आवश्यकता होती है. बुवाई के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी की कलियों का ही चयन करना चाहिए.
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दूरी का गणित और बेहतर देखभाल
खेत की तैयारी करते समय मिट्टी का भुरभुरा होना बेहद जरूरी है और खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि पानी जमा न हो. बुवाई के दौरान कतार से कतार के बीच 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी रखना सबसे बेहतर होता है.
सही दूरी रखने से पौधों की जड़ों और कंदों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे लहसुन का आकार मोटा और ठोस बनता है. समय पर हल्की सिंचाई, जैविक खाद का उपयोग और रोग-कीटों से बचाव करके किसान भाई इस रबी सीजन में लहसुन की फसल से रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं.
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