दुनिया के कई हिस्सों में खेती के लिए मीठे पानी की कमी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में समुद्र का पानी एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आया है. लेकिन सीधे समुद्र के पानी से खेतों की सिंचाई करना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें नमक और दूसरे घुले हुए खनिजों की मात्रा बहुत अधिक होती है. ज्यादा नमक मिट्टी में जमा होकर पौधों की जड़ों की पानी सोखने की क्षमता कम कर देता है और फसल को नुकसान पहुंचा सकता है.
हालांकि वैज्ञानिक अब कुछ ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जिसमें समुद्र के पानी का इस्तेमाल खेती करने के लिए किया जाए. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर समुद्र के पानी से खेती कैसे संभव हो सकती है और इसके लिए इन किन चीजों का ख्याल रखना जरूरी होता है. इनमें डिसैलिनेशन यानी समुद्री पानी से नमक अलग करने की तकनीक सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जा रही है.
पहले पानी से निकाला जाता है नमक
समुद्री पानी को खेती के योग्य बनाने के लिए सबसे प्रमुख तरीका रिवर्स ऑस्मोसिस है. रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) एक ऐसी प्रोसेस है जिसके जरिए समुद्री या खारे पानी से नमक और अन्य अशुद्धियों को अलग करके उसे मीठा और इस्तेमाल करने के योग्य बनाया जाता है. इसमें समुद्री पानी को सेमी-परमिएबल मेमब्रेन से दबाव के साथ गुजारा जाता है. यह सेमी-परमिएबल मेमब्रेन पानी के मॉलेक्यूल को आगे जाने देती है, जबकि नमक और कई अन्य घुले पदार्थ पीछे रह जाते हैं.
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क्या हर फसल उगाई जा सकती है?
डिसैलिनेशन के बाद मिलने वाला पानी कई फसलो की सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि समुद्री पानी सीधे खेत में डाल दिया जाए. पानी की गुणवत्ता, मिट्टी, फसल और स्थानीय मौसम के अनुसार इसे इस्तेमाल करना बेहतर होता है. कुछ पौधे प्राकृतिक रूप से थोड़ी अधिक सेलेनिटी सहन कर सकते हैं. इन्हें हैलोफाइट्स कहा जाता है. वहीं सैलीकॉर्निया जैसे पौधें भी समुद्री पानी से उगाया जा सकता है. इससे उच्च गुणवत्ता वाला खाद्य तेल और पशुओं के लिए चारा मिलता है.
समुद्र के किनारे खेती के नए मॉडल
समुद्री पानी का इस्तेमाल केवल पारंपरिक खेतों में ही नहीं, बल्कि नियंत्रित वातावरण वाली खेती में भी संभावनाएं पैदा कर रहा है. ग्रीनहाउस, हाइड्रोपोनिक्स और अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों में पानी की मात्रा और पोषक तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है. इससे पानी की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि समुद्री पानी की उपलब्धता भले ही बहुत ज्यादा हो, लेकिन उसे खेती के योग्य बनाना सस्ता नहीं है. डिसैलिनेशन प्लांट लगाने, उन्हें चलाने और साफ किए गए पानी को खेतों तक पहुंचाने में निवेश की जरूरत होती है.
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