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मक्के की इन दो किस्मों पर करें फोकस, मालामाल हो रहे किसान

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ABP News
September 24, 2026•3 min read
मक्के की इन दो किस्मों पर करें फोकस, मालामाल हो रहे किसान

अब किसान ऐसी खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें कम मेहनत और समय में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके. इसके साथ ही बाजार में फसल की मांग भी बनी रहे. वहीं कुछ किसान अपनी फसल को केवल बाजार या ग्राहक तक ही सीमित नहीं रखना चाहते. वे अपनी फसल को ऑनलाइन के साथ-साथ फूड इंडस्ट्री को बेच कर दोगुना पैसे कमा रहे हैं.

ऐसे में किसानों के लिए मक्के की दो किस्म बेहतर आय के विकल्प के तौर पर उभरी हैं. किसान अब कम समय और कम लागत में तैयार होने वाली स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न पर फोकस कर रहें हैं. यह दोनों ही मक्के की आधुनिक किस्में है. आज इनकी मांग बाजार के साथ-साथ शादी-पार्टी और रेस्टोरेंट में सबसे अधिक है. इसी अवसर का फायदा उठाकर किसान अब मालमाल हो रहे हैं. ऐसे में जानिए स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती से जुड़ी कुछ खास जानकारी.

कम समय में तैयार होता है स्वीट कॉर्न

स्वीट कॉर्न आम मक्के के मुकाबले ज्यादा मीठा और मुलायाम होता है, यही वजह है कि यह खाने में बेहद रसीला होता है. इसकी खास बात यह है कि इसकी खेती तीनों खरीफ, रबी और जायद सीजन में की जा सकती है. स्वीट कॉर्न बुवाई के लगभग 75-85 दिनों के बाद मिल जाता है. इसका इस्तेमाल सूप, पिज्जा, सलाद और चाट में किया जाता है. इसकी खेती करने के लिए दोमट मिट्टी सबसे बेहतरीन मानी जाती है. वहीं मिट्टी की जल निकासी भी अच्छी होनी चाहिए.

खेत की करें जुताई

स्वीट कॉर्न की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की दो-तीन बार अच्छी तरह जुताई करें. इसके बाद मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उसमें गोबर या जैविक खाद मिलाएं. बीजों के मिट्टी में करीब 2-3 इंच गहराई में बोना उचित होता है. वहीं इनके बीच में जगह छोड़ना इनके विकास के लिए अच्छा होता है.

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बेबी कॉर्न देगा अच्छी आय

बेबी कॉर्न 50-60 दिनों में तैयार होने वाली फसल है. इसे पूरी तरह विकसित होने से पहले ही तोड़ लिया जाता है. जब इसके बाल निकलने लगते हैं, तब इसकी 2-3 दिन में तुड़ाई करनी होती है. इसी दौरान मक्का नरम रहता है और खाने के लिए बेहतर होता है. इसकी खेती भी किसान साल में लगभग 3 बार कर सकता है.

अच्छा जल निकासी वाली मिट्टी होती है बेहतर

बेबी कॉर्न की खेती करने के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है. अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में कॉर्न का सड़ने का खतरा नहीं रहता. वहीं बुवाई से पहले मिट्टी में गोबर या जैविक खाद मिलाना इनकी पैदावार के लिए अच्छा होता है. बुवाई के बाद नियमित सिंचाई और सही देखभाल कर किसान इससे बेहतर मुनाफा कमा सकता है.

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