अगर आपके परिवार में भी कोई खेती-बाड़ी करता है. तो उत्तर प्रदेश सरकार की एक बेहद शानदार और काम की योजना के बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए. खेत-खलिहान में काम करते वक्त कई बार अनजाने में अनहोनी हो जाती है. जिससे पूरा परिवार गहरे संकट में आ जाता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कृषक दुर्घटना कल्याण योजना की शुरुआत की है.
जिससे किसानों और उनके आश्रितों को पैसों की तंगी का सामना न करना पड़े. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर इस खास योजना का फायदा असल मायनों में किन किसानों को मिलता है और इसके लिए क्या नियम बनाए गए हैं. चलिए आपको बताते हैं इस योजना से जुड़ी पूरी जानकारी ताकि जरूरत पड़ने पर आप और आपका कोई जानने वाला समय पर इसका पूरा लाभ उठा सके.
इन किसानों को मिलता है फायदा
सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि यह योजनाउत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बनाई गई है. इस योजना का लाभ पाने के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि किसान उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए. इसके अलावा किसान के पास जमीन के दस्तावेज होने चाहिए और राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी में उसका नाम दर्ज होना जरूरी है. बहुत से किसान यह सोचते हैं कि क्या बटाई पर खेत लेकर खेती करने वालों को भी इसका लाभ मिलेगा.
तो आपको बता दें कि नियमों के मुताबिक बटाईदार और दूसरे तरीकों से खेती करने वाले रजिस्टर्ड किसानों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाता है. अगर आप उत्तर प्रदेश के मूल किसान हैं और खेती-किसानी से जुड़े कागजात आपके नाम पर पक्के हैं. तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में आप या आपके परिवार के सदस्य इस योजना के तहत मदद पाने के पूरे हकदार बन जाते हैं.

इतनी आर्थिक मदद मिलती है
इस योजना का सबसे बड़ा मकसद उस परिवार को आर्थिक संबल देना होता है. जिसके घर के कमाने वाले मुख्य सदस्य के साथ कोई गंभीर हादसा हो जाता है. अगर खेती का काम करते वक्त या किसी भी अन्य दुर्घटना की वजह से किसान की मृत्यु हो जाती है. तो सरकार की तरफ से उसके आश्रित परिवार को पूरे 5 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता दी जाती है.
वहीं दूसरी तरफ अगर दुर्घटना इतनी भयानक न हो लेकिन किसान स्थायी रूप से दिव्यांग या विकलांग हो जाता है. तब भी उसे निराश होने की जरूरत नहीं पड़ती. शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचने या विकलांगता की स्थिति में प्रतिशत के हिसाब से 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि सीधे पीड़ित किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. जिससे वह अपना इलाज करवा सके.
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कैसे मिलता है योजना का फायदा?
अब सबसे जरूरी बात यह आती है कि इस योजना का फायदा लेने के लिए आपको क्या करना होगा और कौन से दस्तावेज तैयार रखने पड़ेंगे. दुर्घटना होने की स्थिति में सबसे पहले पुलिस थाने में एफआईआर यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराना या फिर संबंधित अधिकारी के पास पंचायतनामा की कॉपी तैयार कराना बेहद जरूरी होता है. इसके अलावा डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, किसान का आधार कार्ड, बैंक पासबुक और जमीन की खतौनी जैसे सभी कागजात को फाइल के साथ लगाना पड़ता है.

आपको इस बात का खास ख्याल रखना होता है कि घटना के तय दिनों के भीतर ही अपना क्लेम फॉर्म भरकर संबंधित तहसील या जिला कृषि विभाग के दफ्तर में जमा कराना होता है. क्योंकि देर करने पर आवेदन खारिज भी हो सकता है. अगर आप सभी कागजात समय पर पूरे करके सही तरीके से आवेदन कर देते हैं. तो सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद का पैसा सीधे आपके परिवार तक आसानी से पहुंच जाता है.
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