Fasal Bima Claim: इस साल मौसम ने कई रूप दिखाए. कहीं तेज बारिश और बाढ़ ने किसानों की फसल बर्बाद कर दी, तो कहीं सूखे और ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. ऐसे में जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उनके लिए नुकसान की भरपाई की उम्मीद बनी रहती है. लेकिन बीमा का पैसा पाने के लिए सिर्फ पॉलिसी होना काफी नहीं है, बल्कि सही समय पर नुकसान की सूचना देना और दावा करना भी जरूरी है.
अगर बारिश, बाढ़ या ओलावृष्टि से आपकी भी फसल खराब हो गई है, तो सबसे पहले खेत और नुकसान की तस्वीरें खींच लें. इसके बाद बीमा कंपनी या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दें. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत खेत में अलग से हुए नुकसान और कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी फसल को कुछ तय परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा मिल सकती है. ऐसे मामलों में नुकसान की सूचना आमतौर पर 72 घंटे के अंदर देना जरूरी होता है.
फोन से भी दे सकते हैं नुकसान की जानकारी
किसान फसल खराब होने की सूचना देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के हेल्पलाइन नंबर 14447 पर फोन कर सकते हैं. इसके अलावा योजना के आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in पर जाकर भी जानकारी ले सकते हैं. फोन करते समय अपना नाम, बीमा से जुड़ी जानकारी, बैंक खाते का विवरण और नुकसान की वजह बताने के लिए तैयार रखें. सूचना देने के बाद शिकायत या सूचना का नंबर मिले, तो उसे संभालकर रखें.
इन कागजों को रखें तैयार
बीमा का दावा करते समय किसान को बीमा पॉलिसी या आवेदन संख्या, आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाते का विवरण और खेती से जुड़े कागजों की जरूरत पड़ सकती है. खेत और खराब फसल की तस्वीरें भी संभालकर रखें. कौन-से कागज जरूरी होंगे, यह नुकसान और बीमा योजना के नियमों पर निर्भर कर सकता है.
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सर्वे के बाद तय होगी मुआवजे की रकम
नुकसान की सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारी और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि नुकसान का आकलन कर सकते हैं. इसके बाद योजना के नियमों के अनुसार दावे पर फैसला होता है. बड़े क्षेत्र में फसल खराब होने पर कई मामलों में भुगतान इलाके की पैदावार के आंकड़ों के आधार पर तय होता है. इसलिए हर किसान को अलग से एक जैसी रकम मिले, यह जरूरी नहीं है.
पैसा न मिले तो कहां करें शिकायत?
अगर किसान ने समय पर सूचना दे दी है, लेकिन दावे की स्थिति नहीं पता चल रही या भुगतान में देरी हो रही है, तो वह 14447 पर संपर्क कर सकता है. साथ ही अपने बैंक, बीमा कंपनी या जिले के कृषि विभाग से भी जानकारी ले सकता है.
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